आज के दिन भारतमाता फूली नहीं समाती,
उनकी गोद को धन्य करने भगत सिंह
जैसा सपूत जो आँचल में आया था।
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सुप्रभातम्
चलिए आज हम साहित्य सिंधु की
एक मीठी निर्झरी की कुछ बूँदों का
आस्वादन करते हैं।
आज पढ़ते हैं
जयशंकर प्रसाद जी की कुछ रचनाएँ,
आप भी आनंद लीजिए
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अधरों में राग अमंद पिए
अलकों में मलयज बंद किए
तू अब तक सोई है आली
आँखों में भरे विहाग री!
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समय भागता है प्रतिक्षण में,
नव-अतीत के तुषार-कण में,
हमें लगा कर भविष्य-रण में,
आप कहाँ छिप जाता है
सब जीवन बीता जाता है
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सूने नभ में आग जलाकर
यह सुवर्ण-सा ह्रदय गला कर
जीवन-संध्या को नहलाकर
रिक्त जलधि भरने वालों को?
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अब चलिए आप के द्वारा सृजित रचनाओं के
संसार में
आदरणीय दिलबाग सिंह विर्क जी
ये सच है, ये यादें जलाती हैं तन-मन को मगर
तन्हाइयों में अक्सर इनका ही सहारा होता है।
क़त्ल करने के बाद दामन पाक नहीं रहता इसलिए
ख़ुद कुछ नहीं करता, सितमगर का इशारा होता है।
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आदरणीया अनिता जी
भावों की हाला पी पीकर
होश गँवाए ठोकर खायी,
व्यर्थ किया पोषण उस 'मैं' का
बुनियाद जिसकी नहीं पायी
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आदरणीय पुरुषोत्तम जी
प्रवाह प्रबल मन के आवेगों में,
कहीं दूर बहा ले जाता है,
कण-कण प्लावित कर जाता है,
बेवश कर जाता है....
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आदरणीया पम्मी जी
तिजारत-सरे-बाजार में तलबगार खुश है
फिर क्यूँ तुम गुजरे गाफिल की तरह।
शोख,वफा,जज़्ब में हिज्र की आजमाइश है
फिर क्यूँ ये ठहरे साहिल की तरह।
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आदरणीय शशि जी
रात्रि की इस तन्हाई में जब हम दो ही साथ होते हैं , अक्सर यह सवाल मैं अपने मासूम दिल से पूछता हूँ कि बंधु माना कि हम किसी के नहींं हो सके ना कोई हमारा ही हुआ ,तो भी तुम्हें इन नगमों की थपकियों से नींद की देवी के आगोश में पनाह दे ही देता हूँ। देखों न हम -तुम आपस में कितने लड़ते -झगड़ते हैं, रूठते- मनाते हैं और जीवन का हर दर्द खुशी- खुशी बांट लेते हैं। यह मान लेते हैं कि हम दोनों की नियति है, यह तन्हाई। हाँ, यह सत्य है कि तुम्हारी अनेक चाहतों को मैं पूरा नहीं कर सका हूँ । तुम्हारी उदासी कभी- कभी मेरे मुस्कुराते चेहरे पर भी झलक आती है। तुम्हारी मासूमियत पर , तुम्हारी कसमसाहट पर , तम्हारी बच्चों जैसी बातों पर जब तरस मुझे आता है , तो एक टीस हृदय में उठती है। स्मृतियों के पटल पर अतीत का मानचित्र बनने लगता है -
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आज सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर का जन्मदिवस है।
सुनिये कोकिल कंठी की आवाज़ में
मेरी पसंद का एक गीत
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आज का अंक आपको कैसा लगा?
कृपया अपनी प्रतिक्रिया
से हमें आपके बहुमूल्य सुझाव
जरुर दीजिए।
हमक़दम के विषय में
आज के लिए इतना ही
कल आ रही हैं विभा दी
अपनी विशेष प्रस्तुति के साथ






