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शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

1162....एक आदमी राम हो गया है, सलाम कर, उसकी सवारी आ रही है

आज मुसलिम धर्मावलंबियों के द्वारा  
 मुहर्रम  मनाया जाता है।
इस्लामी वर्ष यानि हिजरी संवत् यानि 
इस्लामिक कैंलेडर का प्रथम महीना।
हुसैन सहित उनके 72 साथियों के शहीद होने का शोक 
मनाया जाता है। इस दिन लोग काले कपड़े पहनते हैं 
और मातमी जुलुस निकालते हैं 
जिसे "तजिया" कहा जाता है।

आज "विश्व शांति दिवस" भी है। समूची पृथ्वी पर अहिंसा और शांति 
का सुखद और खुशहाली भरा साम्राज्य स्थापित करने के उद्देश्य से  
यह दिवस मनाया जाता है। वर्तमान परिदृृश्य मेें जब मनुष्य ने 
अपनी सीमित और विखंडित सोच में धरती आकाश और जल 
को अशांत कर रखा है शांति दिवस मात्र एक कल्पना,महज 
औपचारिकता के अलावा और क्या हो सकता है? विचारणीय है!

★★★
चलिए आज की रचनाओं का आनंद लेते हैं
आदरणीय अमित निश्छल जी की रचना


जो भविष्य को पाने चल दे, वर्तमान का भान नहीं हो
भूतकाल में दैव प्रेरणा, क्षुधा कभी आराम नहीं हो,
अतुलित चाहत की बारातें, जिसके जीवन में सिर-माथे
सुखी रहे बस नाम मात्र का, उसको ध्यावें, यम आघातें,
नये दौर ने नये सृजन में, सृजित रीति ही कर डाला तो;
कहो मुरारे सृष्टि रीति की, मर्यादा कितनी वांछित है?

★★★
आदरणीय रोहिताश जी की लेखनी से

उड़ान तो निजत्व से झगड़ा है 
होना है आत्मसात तो गहराई में उतर. 
संदली हवा मदहोश करे है 
एक प्रेरणा उतरते जाने की.
यहाँ मिलो दर्द से गले तुम 
बैचेनियों की दरिया में गोते लगाओ 
जहाँ अथाह शांति है 
★★★


आदरणीया कविता जी की रचना


अनमना बैठा है उसका मिट्ठू
टीवी-मोबाईल से छूटी है यारी
गुमसुम है घर का कोना-कोना
क्यों परीक्षा पड़ती सब पर भारी!
★★★
आदरणीया प्रीति अज्ञात जी की लेखनी से प्रस्फुटित

साँझ ढले उतर जाता है नदी में 
एक दिन अचानक वैसे ही
चला जाता है कवि भी 
हाँ, उसके शब्द नहीं मरते कभी 
वे जीवित हो उठते हैं प्रतिदिन 
खिलती अरुणिमा की तरह 

★★★
 पढ़िए आदरणीय रवींद्र जी की लेखनी से 
एक समाचार काव्य 

हम देखेंगे 
वैज्ञानिक प्रतिभा की 
हत्या की बात 
किसने अपने सर ली होगी 
स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजिन 
विकसित करने में हुई देरी से 
देश को हुई क्षति की 
भरपाई करेगा कौन 
★★★
और चलते-चलते उलूक के पन्नों से पढ़िए

उस बात को 
जिसको 
उसके 

आसपास 

हो रहे पर जब 

सारी जनता 
कुछ भी नहीं 
कहने को 
कहीं भी 
नहीं जा री 



आज  की प्रस्तुति आपको कैसी लगी?
कृपया अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया अवश्य 
दीजिएगा।

इस सप्ताह के हमक़दम का विषय
जानने के लिए

कल आ रही अपनी विशेष प्रस्तुति के साथ
आदरणीय विभा दी


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