सादर अभिवादन
सप्ताह का एक दिन है,
जो शनिवार के बाद और सोमवार से पहले आता है,
और यह सूर्य देव (सूर्य) को समर्पित एक शुभ और महत्वपूर्ण दिन है,
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
निवेदन।
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फ़ॉलोअर
रविवार, 25 जनवरी 2026
4633 मजबूत मजबूर मशहूर और मगरूर किसका कौन सा दिन है
शनिवार, 24 जनवरी 2026
4632 ..सब तो हो ही रहा है न, अब भी तुम्हारे बिना भी
काफी दिनों के बाद प्रस्तुति लगा रहा हूँ
कुछ भूला-भटका सा लग रहा है
हो सकता है कोई प्रस्तुति दुबारा लग गई हो
तो भी पढ़ लीजियेगा
अगर कसमें सच्ची होती हो
तो तो सबसे पहले खुदा मरता
शुक्रवार, 23 जनवरी 2026
4631.... तुम्हारी सोच तय करती है...
शुक्रवारीय अंक में
बुद्धिरूपिणी देवी माँ सरस्वती को शत-शत नमन।
संपूर्ण प्रकृति उल्लासित और श्रृंगारित होने लगती है।
वृक्षों में नूतन किसलय,चित्ताकर्षक पुष्पों की सुवासित छटा,
आम्र मंजरियों से लदी अमराई में कोयल की कूक
एवं भ्रमरों के गान, सरस रागिनी प्रकृति सौंदर्य
को सुशोभित करते हैं, बसंती हवाओं की सुगंध कण-कण
में बिखर जाती है। हर्षित धरा का गान हृदय में
प्रेम और पवित्रता का संचार करते है। जग के झमेले
से हटकर अपनी व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर
आप भी प्रकृति के उत्सव को महसूस कीजिए।
किसी पुराने स्वेटर की तरह है
जो अब पहना नहीं जाता
पर फेंका भी नहीं जाता
ठंड अचानक बढ़ जाए
तो वही
सबसे पहले याद आता है
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गुरुवार, 22 जनवरी 2026
4630..मौन का पड़ाव
गुरुवारिय प्रस्तुतिकरण के क्रम को बढाते हुए..
ज़रूरी है युद्ध—
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थप्पड खाकर वो 'डिस' उनकी
यूं, थोड़ी हमने भी चख दी थी,
✨️
मौन का पड़ाव
✨️
बुधवार, 21 जनवरी 2026
4629..मैं सूर्य हूँ..
।।प्रातःवंदन।।
"मैं चलते-चलते
इतना थक गया हूँ,
चल नहीं सकता
मगर मैं सूर्य हूँ,
संध्या से पहले
ढल नहीं सकता "
कुँअर बेचैन
जीवन की गतिशीलता और इस पर विचार व्यक्त का इससे सुंदर भावपूर्ण रूप और क्या हो सकता, साथ ही प्रस्तुतिकरण पर नजर जरूर डाले..✍️
इश्क़ में तेरे फनकार बन करने लगी शायरी सनम
जो बिन बोले गुफ्त़गू कीं ऑंखों से ऑंखों ने सनम
और तुम मुस्कुराये हर ज़ख्म का इलाज़ हो गया है ।
जब से तुझको नज़र भर कर देखी हैं ऑंखें सनम
आशिकों की तरह आशिकाना मिज़ाज हो गया है
इश्क़ में तेरे डूबी जिस्म से रूह में समा गये सनम
दुनिया कहती है मेरा दीवानों सा अंदाज़ हो गया है ।
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है अंधेरा तो उजाला भी
यहां पर आयेगा
यह मयूरा वन के भीतर
इस तरह हर्षायेगा
जिंदगानी लेगी करवट ..
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इसे वो पढ़ें जो हर वक्त कहते हैं कि ''क्या करें...फुरसत ही नहीं मिल रही''....
पहले ऊपर का चित्र देखिए फिर पढ़िए आज की ये पोस्ट...ये उनके लिए है जो हर..
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वह चेतावनी भी देती है।
आंखें दिखाती है,
बार-बार,
बिना चिल्लाए ।
मगर हम हैं कि..
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फिल्म समीक्षाः मानवीय संबंधों पर बनी बेहतरीन फिल्म केडी
इन दिनों मुझे तमिल फिल्में देखने का चस्का लग गया है. बेशक, दक्षिण भारतीय फिल्मों में पर लाउड होने का आरोप लगता है और ज्यादातर मामलों में सही हो होता है. पर अब हिंदी फिल्में लाउड हो रही हैं और ज्यादातर हिंदी फिल्मों में कथानक गुम हो रहा है...
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।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'..✍️
मंगलवार, 20 जनवरी 2026
4628... इतिहास लिखे जो कायरता
“जीवन का अर्थ खोजने के लिए नहीं, बल्कि उसे जीने के लिए है।”
“जीवन का उद्देश्य खुश रहना है।”
“हर पल का अर्थपूर्ण तरीके से जीना ही जीवन का अर्थ है।”
“दूसरों की सेवा करना ही जीवन का सच्चा अर्थ है।” –
“अपनी पूरी क्षमता तक जीना ही जीवन का अर्थ है।”
आपकी दृष्टिकोण से जीवन की परिभाषा क्या है?
जो मस्तक झुकते आए हैं,
अब उन्हें जरा तन जाने दो,
जो न्याय की बाँसुरी टूट गई,
उसे फिर से स्वर बन जाने दो।
बाज़ार सजा है झूठों का,
तुम अपना सच ले अड़ जाओ,
इतिहास लिखे जो कायरता,
उस पन्ने को फट जाने दो।
मैं जल हूँ
घर से नदी-नालों तक
करता कल-कल हूँ
उत्तर से दक्षिण तक
चलता पल-पल हूँ
मुझमें कचरा न फैलाओ
मुझे बचाओ
घने बादल न चुराओ
मुझे बचाओ
सोमवार, 19 जनवरी 2026
4627...और हमें एहसास हुआ कि...
आप सभी का स्नेहिल अभिवादन।
“तुम जो भी हो, तुम जो भी करते हो, तुम अद्भुत और अद्वितीय हो. इस बात पर कभी शक मत करो।”
“यदि तुम्हें लगता है कि तुम यह कर सकते हो, तो तुम कर सकते हो. और यदि तुम्हें लगता है कि तुम यह नहीं कर सकते हो, तो तुम सही हो।”
“खुशी वह यात्रा है, मंजिल नहीं।”
“सफलता वह नहीं है जो आप हासिल करते हैं, बल्कि वह है जो आप बन जाते हैं जब आप उसे हासिल करते हैं।”
“सफलता अंतिम गंतव्य नहीं है, बल्कि यात्रा का आनंद लेने की प्रक्रिया है।"
आज की रचनाऍं-
मौन बदलता है दृष्टिकोण।
देखने देता है दूसरा पक्ष ।
यज्ञ की समिधा है मौन ।
मौन गहरे पैठ पा जाता है मर्म।
मौन है गहरे कूप का जल ।
मन प्रांत कर देता शीतल ।
मौन का आकाश है स्वतंत्र।
मौन की व्याख्या है मौन ।
के किनारे, यूँ तो आज नहीं ज़ेब
में एक भी ढेला, शून्य में थमा
हुआ सा लगे है सांसों का
हिंडोला । छोटी छोटी
खुशियों में रहते हैं
शामिल लंबे
उम्र के
राज़,
















