महापंडित,शब्द शास्त्री त्रिपिटकाचार्य, अन्वेषक,यायावर,कथाकार,
निबंध-लेखक, आलोचक,कोशकार अथक यात्री और न जाने ऐसे कितने
ही उपनामों से सुशोभित साहित्य जगत के विशिष्ट साहित्यिक सर्जक
राहुल सांस्कृत्यायन का नाम का एक अलग स्थान रखता है।
निबंध-लेखक, आलोचक,कोशकार अथक यात्री और न जाने ऐसे कितने
ही उपनामों से सुशोभित साहित्य जगत के विशिष्ट साहित्यिक सर्जक
राहुल सांस्कृत्यायन का नाम का एक अलग स्थान रखता है।
९ अप्रैल१८९३ में आजमगढ़ उत्तरप्रदेश में जन्में तत्वाकार,युगपरिवर्तक, अग्रणी विचारक को शब्दों में समेट पान असंभव है । जीवन के बाह्य-यात्रा और अंतर्यात्रा के विरले प्रतीक ,पैनी दृष्टि प्रवाहपूर्ण लेखनी के द्योतक राहुल सांस्कृत्यायन का साहित्यिक योगदान अतुलनीय है।
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सादर अभिवादन
उड़ान शब्द स्वतंत्रता का प्रतिनिधित्व करता है। बंधनमुक्त हो अपनी क्षमता के अनुरुप क्रियाशीलता से मिलने वाली खुशी उड़ान होती है । मन के नकारात्मक विचार के पिंजरों को तोड़कर सकारात्मकता के पंखों पर जो मंजिल तक पहुँचने के लिए उड़ान भरते हैं वो कभी असफल नहीं होते हैंं। अपने हौसलों और दृढ़ संकल्प की उड़ान से हम अपने लक्ष्य को पा सकने में सक्षम है, बस अपने कर्मों के पंखों पर भरोसा रखिये।
अब दृष्टि डालते हैं आपकी रचनात्मकता के आसमान पर
अभिव्यक्ति के पंख पसारे मोहक उड़ान पर।
अभिव्यक्ति के पंख पसारे मोहक उड़ान पर।
चलिए आपकी सृजनशील लेखनी के परों पर उड़ते हुये आपकी प्रतिभा
को महसूस करते है आपकी रचनाओं के द्वारा-
को महसूस करते है आपकी रचनाओं के द्वारा-
आदरणीया मीना जी
आकाश से ऊँची
जरा उड़ान भर !
पर्वत से उच्च,अपना
स्वाभिमान कर !
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आदरणीय पुरुषोत्तम जी
धर्म, जाति, कुल, वंश का न रहे कोई भेद,
परिधियों के परे हो मेरी पहचान,
विश्व कल्यान हों जिनका आदर्श,
परिधि खुद हो सके विस्तृत,
समय के साथ बढ़ जाने को।
परिधियों के परे हो मेरी पहचान,
विश्व कल्यान हों जिनका आदर्श,
परिधि खुद हो सके विस्तृत,
समय के साथ बढ़ जाने को।
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