।।शुभ वन्दन।।
इस सुंदर ,सुसंस्कृत ,सुविचार शब्दों से
आज का संकलन की ..✍
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तुझको कण- कण में
खोजने का करूँ जतन
पर कहाँ मैं तुझको पाऊँ
ये मन समझ न पाए
आस बड़ी है
तुझको पाने की
और एक पल को
हो निराश मैं सोचूँ
क्या कभी मनोरथ ये मेरा
हो पाएगा पूरा
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न शक्ल-न अक्ल, न संगी-न साथी, न जानकारी-न अनुभव, न सहयोग-न मार्गदर्शन, न धन-न साधन, यानि सफलता के लिए जरूरी सारे मार्ग अंधेरों से भरे।
शुभ्रा अवसाद से घिरती जा रही थी। अचानक उसने खुद को झकझोरा और कहा- 'तुम कमजोर नहीं हो शुभ्रा' और अपने हौसले, आत्मनिष्ठा, सपने, चाहतें, लक्ष्य, आशा, समर्पण और स्वाभिमान से आच्छादित करते हुए दृढ़संकल्प के धागे में पिरो लिया।
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तृतीय ब्लॉग "पाल ले इक रोग नादां..." से आनंद ले.।
गुज़र जाएगी शाम तकरार में
चलो ! चल के बैठो भी अब कार में
अरे ! फ़ब रही है ये साड़ी बहुत
खफ़ा आईने पर हो बेकार में
तुम्हें देखकर चाँद छुप क्या गया
फ़साना बनेगा कल अख़बार में..
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फिर पतझड़ में, पत्ता टूटा
शाख़ से उसका, नाता छुटा,
जब तक था, डाली पे लटका
न जान को था, कोई भी खटका..
अब कौन करें उसकी रखवाली
रूठ गया जब बगिया का माली..
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सुनहरे ख़्वाब मेरे,शब्द बनके कविता में ढल रहे हैं,
मेरे ख्यालों के शब्द,प्रश्न बनके मुझसे ही पूछते हैं,
ये प्रश्न मेरे जवाब बन,आपके लफ़्ज़ों में पल रहे हैं।
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आखिरी में भोजपुरी गीत..चयैता विशाल गगन जी के स्वर में..
सावन से न भादों दुबर
फागुन से ह चइत ऊपर
गजबे महीना रंगदार..
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हम-क़दम का बारहवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........
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सावन से न भादों दुबर
फागुन से ह चइत ऊपर
गजबे महीना रंगदार..
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हम-क़दम का बारहवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........
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।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह..✍




