सादर अभिवादन।
हिन्दी के जाने-माने वरिष्ठ साहित्यकार ,
आधुनिक कविता के सशक्त हस्ताक्षर
एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त लेखक केदारनाथ सिंह जी का
विगत सोमवार को दिल्ली में निधन हो गया।
हिन्दी साहित्य जगत् में इस समाचार से
शोक की लहर व्याप्त हो गयी।
पाँच लिंकों का आनन्द परिवार
उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
उनकी एक रचना पर नज़र डालिये-

अंत महज एक मुहावरा है
अंत में मित्रों,
इतना ही कहूंगा
कि अंत महज एक मुहावरा है
जिसे शब्द हमेशा
अपने विस्फोट से उड़ा देते हैं
और बचा रहता है हर बार
वही एक कच्चा-सा
आदिम मिट्टी जैसा ताजा आरंभ
जहां से हर चीज फिर से शुरू हो सकती है
परसों "विश्व गौरैया दिवस" मनाया गया और कल "विश्व कविता दिवस" की धूम रही। कुछ उत्कृष्ट रचनाऐं पढ़ने को मिली।
आइये अब आपको पाँच पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलते हैं -

यह जीवन एक तमाशा है
हर मोड़ पे आशा और निराशा है
आशा का सूर्य उदय जब होता
तम रूपी निराशा छट जाती है
टूट जाए जो धैर्य का संबल
जीवन वो कभी न सफल होता है
दिल आखिर तू क्यों रोता है......

सेठ और साहब
नहीं सुनते गुहार
नहीं देखते उनकी ओर ।
शीशे चढ़ी कार के पास
होकर खड़े
पत्थर के बुतों को निहारते बच्चे
गोया माँग रहे हों भीख ।
सारनाथ, बनारस में दिए पहले उपदेश में गौतम बुद्ध ने चार आर्य सत्य बताए:
- जीवन में दुःख है,
- दुःख का कारण है,
- दुःख का अंत है और
- दुःख के अंत करने का मार्ग है.

माँ मैंने यही सुना है तू विपदाओं को मिटाती
माँ सबके दुखड़े हरके रोतों को तू है हँसाती
मेरी भी विनती सुनलो इस जग से मैं तो हारा

फ़िक्र-ए-दुनिया है न खुद की है ख़बर कोई मुझे
अब ख़ुशी है न ही कोई ग़म तुम्हारे हिज़्र में
फूल उम्मीदों के सारे आज कांटे बन गए
हर क़दम पतझर का है मौसम तुम्हारे हिज़्र में
हम-क़दम का ग्यारहवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........
आज के लिए बस इतना ही।
मिलते हैं फिर अगले गुरूवार।
कल आ रही है आदरणीया श्वेता सिन्हा जी की प्रस्तुति।
रवीन्द्र सिंह यादव
हम-क़दम का ग्यारहवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........
आज के लिए बस इतना ही।
मिलते हैं फिर अगले गुरूवार।
कल आ रही है आदरणीया श्वेता सिन्हा जी की प्रस्तुति।
रवीन्द्र सिंह यादव