सादर अभिवादन।
आइये अब इस अवसर पर कुछ पसंदीदा रचनाओं पर नज़र डालें -
पुराने खत....डॉ.इन्दिरा गुप्ता
एक पुराना खत जो खुला अनजाने मैं ।
कतरा कतरा लफ्ज बह रहे थे अंदर
स्याही अब तक गीली थी अफसानों में ।
नारी : कही-अनकही.... श्वेता सिन्हा
अपनी श्रेष्ठता,प्रमाणिकता सिद्ध करने के लिए हर बार औरत को प्रमाण देना पड़ता है,अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ता है। ईश्वर के द्वारा बनाई गयी सर्वश्रेष्ठ कृति नारी कोमल तन-मन की स्वामिनी होती है, पर कभी-कभी महसूस होता है औरत की सृजनात्मक क्षमता ही उसका अभिशाप है इसी शक्ति को कमजोरी बनाकर समाज हथियार की तरह उसी के खिलाफ इस्तेमाल करता है। उसका मानसिक,शारीरिक और भावनात्मक दोहन किया जाता है।
मेरा और किसी भी पुरुष का कोई वजूद इस दुनिया में स्त्रियों के बिना असम्भव है। स्त्री एक भाव है जिसके बिना पुरुष ‘अ’भाव है। आपके जीवन की कहानी भले ही मेरे जैसी ना हो लेकिन आपके भी आस - पास ऐसी महिलाएँ अनेक रूप में होंगीं जिन्होंने आपके जीवन पर गहरा प्रभाव छोड़ा होगा। उन सभी को नमन।
नर- नारी ..... विश्व मोहन
तू जीवन, मैं दाव,
तू भाषा, मैं भाव.
मैं विचार, तू आचारी,
तू नर, मैं नारी.
फैसला ......रिंकी राऊत
शारदा, मोहन और पंचायत ने अपना-अपना फैसला लिया I एक दिन किसी ने शारदा के बच्चों से पूछा तुम्हारी माँ कहा है? उनका जवाब था “ वो मर गई” ये
बच्चों का फैसला था
प्रणय रंग की बतियाँ ...... अपर्णा बाजपेयी
ऐसी प्रीत का घूँट पिया है मीरा बन कर डोली
पिय के रंग में रंगी दुल्हनिया लाज-शर्म सब भूली
प्रणय रंगों में खोकर, छुपकर प्रियतम को रंग आयी
खुद को खोकर उसको पाया ऐसी रीत बनायी।
औरत को औरत ही रहने दिया जाए ....अभिलाषा (अभि )
वो वक़्त पड़े तो झुकती है,
तूफानों में कहाँ रुकती है,
है प्रशंसित वो सहने में तो सहने दिया जाए,
पर औरत को औरत ही रहने दिया जाए।
नारी नहीं है बेचारी-महिला दिवस विशेष ...शालिनी कौशिक

हिम्मत दिखा दे अब, खुद को आज़ाद कर,
बाहर निकल, पैर की जंजीर तोड़ कर,
कब तक होगी तेरी सब्र की इम्तिहाँ
अब यूँ ही ना तुम ज़ुल्म को स्वीकार कर.
चल रही है,कब से, परिवर्तन की लहर-2
वक्त का बदलाव.... ऋता शेखर'मधु'
"यही बात सदियों से कही जा रही। पर कहने वाले बदल गए। है न जीजी" सुहासिनी को वो दिन याद आ गया जब दूसरी बिटिया के जन्म पर बुरा सा मुँह बनाकर जीजी ने कहा था,"फिर से बेटी" ।
चलते-चलते आदरणीया शुभा मेहता जी के सुमधुर कंठ से निकली सुरीली आवाज़ का आनन्द लीजिये-
जाना था हमसे दूर.... शुभा मेहता
हम-क़दम का नौवां क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........
आज की चर्चा में शामिल होने के लिये आपका शुक्रिया।
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार।
कल की प्रस्तुति के साथ चर्चा आरम्भ करेंगी आदरणीया श्वेता सिन्हा जी।
रवीन्द्र सिंह यादव
का विषय...
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फिर मिलेंगे अगले गुरूवार।
कल की प्रस्तुति के साथ चर्चा आरम्भ करेंगी आदरणीया श्वेता सिन्हा जी।
रवीन्द्र सिंह यादव





