।।शुभ भोर वंदन।।
┅
दहलीज पार कर रास्ते बनाती
आधी आबादी..
महिला दिवस पर अगर
ग्रामीण महिलाओं की जिक्र न हो तो नारी सशक्तिकरण अधूरा है..
आँखों में कल के सपनों को सजोये नित्य सामाजिक रुढियों और बेड़ियों
से जुझती ये महिलाएँ .. कईयों ने अपार साहस के साथ मुकाम हासिल किया है..
नमन उन तमाम ग्रामीण सखियों को जिनमें साहस ,संकल्प ,सपना और नयी सोच है।
अब रुख करते आज के चुनिंदा लिकों पर..✍
कृपया रचनाकारों के नाम क्रमानुसार पढे..
आदरणीय डॉ.राजीव जोशी जी
आदरणीया अलकनंदा सिंह जी
आदरणीया साधना वैद जी
आदरणीया रश्मि शर्मा जी
आदरणीय सुधीर गुप्ता जी
आदरणीय विश्वमोहन जी
🔲
ग़ज़ल
तुम जैसे दोस्त दो-चार ढूंढता हूँ।
फुर्सत नहीं कि अपने गिरेबाँ में झाँकूँ
गैरों में मुकम्मल किरादर ढूंढता हूँ।
नैसर्गिक अधिकारों व कर्तव्यों को
लेकर सदियों पुरानी भारतीय सभ्यता का कोई सानी नहीं, इसके बाद भी यदि हम
सुसंस्कृत कहलाने के लिए पश्चिम की ओर देखें तो हमसे बड़ा मूर्ख और कौन हो सकता है।
हम भारतीय मांऐं ही नहीं, दुनियाभर की मांओं को जिस तरह ये नैसर्गिक अधिकार
प्राप्त है कि अपने शिशु को स्तनपान कराने से ना तो कोई रोक सकता है और ना
ही इसके लिए अनुमति की आवश्यकता होती है, ठीक उसी तरह शिशु को भी मां
के दूध से कोई वंचित नहीं रख सकता।
🔲
कुछ दिन पूर्व हर दिल अजीज़, बेहद खूबसूरत
और बेहद प्रतिभाशाली अभिनेत्री श्रीदेवी का असमय ही संसार से विदा लेकर चले
और बेहद प्रतिभाशाली अभिनेत्री श्रीदेवी का असमय ही संसार से विदा लेकर चले
जाना उनके प्रशंसकों और चाहने वालों
को बुरी तरह से झकझोर गया ! अभी
उनकी उम्र नहीं थी अलविदा
कहने की ! फिर वतन की मिट्टी से ..
🔲
बेहद बेचैन होता है
मन
और जब
वक्त कठिन होता है
भागती-फिरती हूं
उन सवालों से
जो किसी इंसान की
चीर-फाड़ को आतुर होता है
🔲
समीर शरारत सों सों करता/
अमराई की आहट में//
सरमाती सुस्ताती धरती/
चुलबुल चैत की चाहत में//
शीत तमस ने किया पलायन/
सूरज ने ऊष्मा घोली//
कोकिल कुंजित चित चितवन में/
हारिल की हरी डाली डोली//
अब यही थमती हूँ कल रूबरू होते हैं रवीन्द्र जी की प्रस्तुति के साथ
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह..✍




