आज हमारी यशोदा दी का जन्मदिवस है।
शंतनोतु हि सर्वदा मुदम् ।
प्रार्थयामहे भव शतायु:
ईश्वर सदा त्वाम् च रक्षतु ।
पुण्य कर्मणा कीर्तिमार्जय
जीवनम् तव भवतु सार्थकम्
प्रिय सखि, यह जन्मदिन आपको शुभता
और प्रसन्नता सदैव के लिए प्रदान करे।

जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ आपको मेरी प्यारी दी।
सदैव आरोग्य एवं सुख का आशीष मिलता रहे प्रभु से यही प्रार्थना है।
सदा मुस्कुराते रहे दी।
दिशा में, वर्षा के पश्चात् लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला,
तथा बैंगनी वर्णो का एक विशालकाय वृत्ताकार वक्र कभी-कभी
दिखाई देता है। यह इंद्रधनुष कहलाता है। वर्षा अथवा बादल में
पानी की सूक्ष्म बूँदों अथवा कणों पर पड़नेवाली सूर्य किरणों का
विक्षेपण (डिस्पर्शन) ही इंद्रधनुष के सुंदर रंगों का कारण है।
सूर्य की किरणें वर्षा की बूँदों से अपवर्तित तथा परावर्तित होने के
कारण इन्द्रधनुष बनाती हैं। इंद्रधनुष सदा दर्शक की पीठ के पीछे
सूर्य होने पर ही दिखाई पड़ता है। पानी के फुहारे पर दर्शक के
पीछे से सूर्य किरणों के पड़ने पर भी इंद्रधनुष देखा जा सकता है।
मानव के धरा पर प्रथम पग रखने से शून्य में विलीन होने तक
की यात्रा में इंद्रधनुष के रंग विविध रुप में हमारे साथ-साथ रहते हैं।
हमक़दम के चौथे क़दम में इंद्रधनुष के झिलमिलाते रंगों का
अप्रतिम सौंदर्य और संदली ख़ुशबू जो आप सभी सृजनशील
रचनाकारों की प्रतिभा सम्पन्न लेखनी से प्रसवित हुई है,
उसे महसूस कीजिए। इंद्रधनुष के विविध रंगों से सराबोर
अप्रतिम सौंदर्य और संदली ख़ुशबू जो आप सभी सृजनशील
रचनाकारों की प्रतिभा सम्पन्न लेखनी से प्रसवित हुई है,
उसे महसूस कीजिए। इंद्रधनुष के विविध रंगों से सराबोर
आपके द्वारा सृजित रचनाओं का आप सभी आस्वादन कीजिए।
डूबकर रचनाओं का आनंद लेते हैं।
सबसे पहले पढ़िये हमारे अंक के विषय के
उदाहरणस्वरूप दिये जा रहे
आदरणीया मीना जी की रचना

इंद्रधनुष
इंद्रधनुष,
आज तुम तोड़ो प्रथा और
गगन से उतरो जमीं पर !
अनछुए रंगों में लिपटूँ ,
मैं तुम्हारे गले लगकर
मुस्कुरा लूँ,आज जी भर !
तुम अगर दे दो इजाजत !
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीय विश्वमोहन जी
इन्द्रधनुष
बैंगनी कोर वाली नीली साड़ी,
आसमानी ओढ़नी,
खनखनाती हरी चूड़ियाँ,
पसीजता पीतास मन पिता का!
फाड़कर चादर बादलों की
अपनी पीताभ किरणों से
पोंछता पसीने कपाल के
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीया नीतू जी की दो रचनाएँ
बसंत देखो ऋतुराज का आगमन हो गया

सारी मायूसियाँ अब विदा हो गई
मातमी सारा मंजर फ़ना हो गया
घाव पतझड़ के फिर सारे भरने लगे
खुशनुमा आज सारा चमन हो गया
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
इंद्रधनुष:मधुर मिलन की परछाई

उस मधुर मिलन की परछाई
कुछ ऐसे रंग सजाती है
बटती है सात रंग में वो
और इंद्रधनुष बन जाती है
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीय साधना दीदी
इंद्रधनुष

स्वर्णिम टिकुली लगा ,
सतरंगी इन्द्रधनुष की
झिलमिलाती चूनर अपने
आरक्त आनन पर ओढ़
इठलाती इतराती
सबको विस्मय विमुग्ध
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीय षुरुषोत्तम जी
इंद्रधनुष:धुन और रंग

किसने कोशिश की जीवन रंग को
सीमित करने की?
जीवन के रंग तो हैं असीमित,
संभव नही कर पाना,
इनकी विविधताओं को सीमित
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीया कुसुम दी
इंद्रधनुषी स्वप्निल बचपन
मन उडता था आसमानों के पार कहीं दूर
एक झूठा सच, धरती आसमान है मिलते दूर ।
संसार छोटा सा लगता ख्याली घोडे का था सफर
एक रात के बादशाह बनते रहे संवर संवर ।
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीया अपर्णा जी की लेखनी से
इंद्रधनुष

इंद्रधनुष का नीला रंग
जब-तब कौंध जाता है
जब प्रकट करती है वह अपनी इच्छा
और बदले में मिलते हैं क्रोध के उपहार,
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
प्यारी सखि दिबू की कलम से
लालिमा सा विस्तार

नारंगी सपनों
का....प्रेम की
लालिमा...सा विस्तार
इंद्रधनुषी...सपनो से
सजा-सँवरा
अपना संसार
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीय पंकज प्रियम् जी
इंद्रधनुष

मतवाला है।
बारिश की बूंदों ने
आसमां रंग डाला है।
सूरज की किरणों ने
कितने रंग संभाला है।
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीया सुधा जी
इंद्रधनुष

नाचे मोर पंख फैलाए
महक उठी बगिया फुलवारी
वसुधा रोम रोम मुस्काए
जाए इंद्रधनुष पर वारी
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीया डॉ. इन्दिरा गुप्ता
इंद्रधनुष

नव रस नव रंग सरीखी
है नवरँगी नार
सात रंग के इन्द्रधनुष सा
उसके जीवन का सार !
सदा सुखद हो रंगोत्सव
ना सदा दुखद सी बात
धीमी आँच सा सुलगें
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीया मीना गुलियान जी की लेखनी से
स्मृतियों का अवशेष हैं मेरे सपने

धरा से आकाश तक हिंडोला मेरा
चन्द्रमा की किरणें आके झुलाती हैं
शीतल बयार लोरी मुझे सुनाती है
तारों की चूनर चन्द्रमा का टीका
पहन इठलाती हूँ झूम जाती हूँ
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीया आँचल जी
इंद्रधनुष काया

जब जागृत हुए सत रंग तुम्हारे
सौ सूर्य ऊर्जा तब तुझमें विराजे
इंद्रधनुषी आनंद तन पाए
आकर्षण से तेरे जग मन हर्षाए
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीया रेणुबाला जी
जाने ये कौन चितेरा है -
ये विस्तार सौदर्य का -
अनुपम और अद्भुत है ये बेला ;
सपनो में रंग भरता है ये -
नील गगन का सतरंगी झूला
मौन दिशाओं में जगा गया स्पन्दन -
रच ये देव -धनुष का घेरा है -
जाने ये कौन चितेरा है ?
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
इंद्रधनुष,
आज तुम तोड़ो प्रथा और
गगन से उतरो जमीं पर !
अनछुए रंगों में लिपटूँ ,
मैं तुम्हारे गले लगकर
मुस्कुरा लूँ,आज जी भर !
तुम अगर दे दो इजाजत !
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीय विश्वमोहन जी
इन्द्रधनुष
आसमानी ओढ़नी,
खनखनाती हरी चूड़ियाँ,
पसीजता पीतास मन पिता का!
फाड़कर चादर बादलों की
अपनी पीताभ किरणों से
पोंछता पसीने कपाल के
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आदरणीया नीतू जी की दो रचनाएँ
बसंत देखो ऋतुराज का आगमन हो गया

सारी मायूसियाँ अब विदा हो गई
मातमी सारा मंजर फ़ना हो गया
घाव पतझड़ के फिर सारे भरने लगे
खुशनुमा आज सारा चमन हो गया
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
इंद्रधनुष:मधुर मिलन की परछाई

उस मधुर मिलन की परछाई
कुछ ऐसे रंग सजाती है
बटती है सात रंग में वो
और इंद्रधनुष बन जाती है
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आदरणीय साधना दीदी
इंद्रधनुष

स्वर्णिम टिकुली लगा ,
सतरंगी इन्द्रधनुष की
झिलमिलाती चूनर अपने
आरक्त आनन पर ओढ़
इठलाती इतराती
सबको विस्मय विमुग्ध
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आदरणीय षुरुषोत्तम जी
इंद्रधनुष:धुन और रंग

किसने कोशिश की जीवन रंग को
सीमित करने की?
जीवन के रंग तो हैं असीमित,
संभव नही कर पाना,
इनकी विविधताओं को सीमित
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आदरणीया कुसुम दी
इंद्रधनुषी स्वप्निल बचपन
मन उडता था आसमानों के पार कहीं दूर
एक झूठा सच, धरती आसमान है मिलते दूर ।
संसार छोटा सा लगता ख्याली घोडे का था सफर
एक रात के बादशाह बनते रहे संवर संवर ।
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आदरणीया अपर्णा जी की लेखनी से
इंद्रधनुष

इंद्रधनुष का नीला रंग
जब-तब कौंध जाता है
जब प्रकट करती है वह अपनी इच्छा
और बदले में मिलते हैं क्रोध के उपहार,
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प्यारी सखि दिबू की कलम से
लालिमा सा विस्तार

नारंगी सपनों
का....प्रेम की
लालिमा...सा विस्तार
इंद्रधनुषी...सपनो से
सजा-सँवरा
अपना संसार
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आदरणीय पंकज प्रियम् जी
इंद्रधनुष

मतवाला है।
बारिश की बूंदों ने
आसमां रंग डाला है।
सूरज की किरणों ने
कितने रंग संभाला है।
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आदरणीया सुधा जी
इंद्रधनुष

नाचे मोर पंख फैलाए
महक उठी बगिया फुलवारी
वसुधा रोम रोम मुस्काए
जाए इंद्रधनुष पर वारी
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आदरणीया डॉ. इन्दिरा गुप्ता
इंद्रधनुष

नव रस नव रंग सरीखी
है नवरँगी नार
सात रंग के इन्द्रधनुष सा
उसके जीवन का सार !
सदा सुखद हो रंगोत्सव
ना सदा दुखद सी बात
धीमी आँच सा सुलगें
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आदरणीया मीना गुलियान जी की लेखनी से
स्मृतियों का अवशेष हैं मेरे सपने
धरा से आकाश तक हिंडोला मेरा
चन्द्रमा की किरणें आके झुलाती हैं
शीतल बयार लोरी मुझे सुनाती है
तारों की चूनर चन्द्रमा का टीका
पहन इठलाती हूँ झूम जाती हूँ
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आदरणीया आँचल जी
इंद्रधनुष काया
जब जागृत हुए सत रंग तुम्हारे
सौ सूर्य ऊर्जा तब तुझमें विराजे
इंद्रधनुषी आनंद तन पाए
आकर्षण से तेरे जग मन हर्षाए
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आदरणीया रेणुबाला जी
जाने ये कौन चितेरा है -
ये विस्तार सौदर्य का -
अनुपम और अद्भुत है ये बेला ;
सपनो में रंग भरता है ये -
नील गगन का सतरंगी झूला
मौन दिशाओं में जगा गया स्पन्दन -
रच ये देव -धनुष का घेरा है -
जाने ये कौन चितेरा है ?
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आप सभी के निरंतर सहयोग से एक-एक क़दम आगे बढ़ते हमक़दम का यह सफर आगे और भी रोमांचक होगा ऐसी उम्मीद करते हैं।
आप सभी के बहुमूल्य सुझावों की प्रतीक्षा में


