नहीं थम रहा बच्चियों के साथ हैवानियत(हरियाणा में घटित घटना)
आखिर ये किस मिट्टी के बने इतनी क्रूरता धृणित कुकृत्य कर आराम से चल पड़ते.. उफ..
क्या संयम, संवेदना, मानवीय भावनाएँ जैसे शब्द विलुप्त होते जा रहे है?
चलो..एक और कानून भी बना ले पर वो संवेदनशील सोच कहाँ से लाए..
बताओं कितने सालों में
हमारा अब हाल बदलेगा..
जरा आप बताएंगे..✍
चलिए अब रौशनी डालते हैं आज की लिंकों पर...
रचनाकारों के नाम क्रमानुसार पढ़ें
आदरणीय राजेश कुमार राय जी,
आदरणीय देवेन्द्र पाण्डेय जी,
आदरणीय रवीन्द्र कुमार यादव जी,
आदरणीय अरुण साथी जी
एवम्
आदरणीया नीतू ठाकुर जी
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रचनाकारों के नाम क्रमानुसार पढ़ें
आदरणीय राजेश कुमार राय जी,
आदरणीय देवेन्द्र पाण्डेय जी,
आदरणीय रवीन्द्र कुमार यादव जी,
आदरणीय अरुण साथी जी
एवम्
आदरणीया नीतू ठाकुर जी
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(1)
इंसान हूँ मगर मैं मुकम्मल न हो सका
शायद मेरे रक़ीब की कुछ बद्दुआ भी है।
(2)
दिन भर हराम कहता रहा मैंकशी को वो
शाम जब ढली तो मैकद़े पहुँच गया।
(3)
एक बार बलिया के पशु मेले में गए थे, एक बार दिल्ली के पुस्तक मेले में। दोनों मेले में बहुत भीड़ आई थी। जैसे पशु मेले में लोग पशु खरीदने कम, देखने अधिक आए थे वैसे ही पुस्तक मेले में भी लोग पुस्तक खरीदने कम, देखने अधिक
चलते-चलते
आज यकायक
दिल में
धक्क-सा हुआ
शायद आज फिर
बज़्म में आपकी
चार माननीयों ने जब लोकतंत्र के लिए खतरे की बात कही तो स्वघोषित कट्टरपंथी और देशद्रोही साबित करो गैंग सक्रिय हो गई है। सोशल मीडिया पर तरह तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। वह भी तब जबकि सुब्रमण्यम स्वामी जैसे स्पष्टवादी व्यक्ति ने भी कह दिया है कि



