निवेदन।


फ़ॉलोअर

892 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
892 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

892 रचनाकार की पसंदीदा रचनाएँ.......

खट्टी-मीठी यादों को समेटे २०१७ की विदाई की घड़ी आ पहुँची है,
नववर्ष बाहें फैलाये स्वागत में तैयार है।
आप सभी को प्रेम और सौहार्द के त्योहार 
क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएँ। 
 आज हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न
माननीय अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म दिवस है। 
अटल जी न सिर्फ़ एक प्रख्यात, उदारमना राजनेता 
और प्रभावशाली वक्ता हैं 
अपितु एक संवेदनशील कोमल हृदय कवि भी है।
उनकी कविता की चंद पंक्तियाँ -

प्राची मे अरुणिम की रेख देख पता हूँ
गीत नया गाता हूँ
टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अन्तर की चीर व्यथा पलको पर ठिठकी
हार नहीं मानूँगा,
रार नहीं ठानूँगा,
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूँ
गीत नया गाता हूँ

आज के सोमवारीय विशेषांक में पाठकों की पसंद के अंतर्गत ब्लॉग जगत की प्रबुद्ध और प्रखर रचनाकार आदरणीया मीना जी लेकर आयी है आज का अंक। कर्तव्यनिष्ठ,जागरुक  शिक्षिका , ममतामयी माँ और एक संवेदनशील कवियित्री  मीना जी के ब्लॉग  "चिड़िया" पर  सुंदर प्रेरक कविताएँ,कहानियाँ ,ग़ज़ल और संस्मरण आदि विधाओं का रसपान हमसब  करते रहते है। अन्य रचनाकारों की  रचनाओं पर उनकी  समीक्षात्मक टिप्पणियाँ हमें विशेष रूप से प्रभावित करती हैं।  
आप भी उनकी पसंद की रचनाओं का आस्वादन कीजिए।

नए वर्ष पर प्यार सहित... सतीष सक्सेना


मन के सोये तार जगाती

याद तुम्हारी ऐसे आयी ,
ऐसी लगन लगी है मन में






बाजुओं में दम अगर भरपूर है...दिगम्बर नासवा
सिर झुकाते हैं सभी दस्तूर है
बाजुओं में दम अगर भरपूर है

चाँद सूरज से था मिलना चाहता






प्राकृतिक छटा...लक्ष्मीरंगम्
सबको सबक सिखाने वाली
हरे रंग की मतवाली डाली,
फूलों से जो महकाती है,





चकोर...श्वेता सिन्हा

मुमकिन नहीं छू पाना
एक कतरा भी
उंगली के पोर से भी
फिर भी अवश हो



राह तुम्हारी तकते - तकते

दुनिया को बिसरा कर दिल ने-

सिर्फ तुम्हे ही याद किया ,
हो चली  दूभर जब तन्हाई
तुमसे मन ने संवाद किया ;
 पल भर को  भी मन की नम आँखों से




सौभाग्यशाली हूँ मैं...अमृता तन्मय

इस निर्मल बोध को
मुझमें प्रकटाने वाले
बिना धुंआ के ही
अपनी शिखा को जलाने वाले
और मेरे आधार पर ही
ऐसी ऊंचाइयां दिलाने वाले
अनन्य सहयोगी मेरे !





कोई कहता है... 
"सुबह सुबह घूमने जाते हैं, लगे हाथ टॉमी को घुमाना भी हो जाता है "
कोई कहता है... 
"सुबह सुबह घूमने जाते हैं, लगे हाथ दूध का पैकेट भी ले आते हैं"
कोई कहता है.... 
"सुबह सुबह घूमने जाते हैं,लगे हाथ बच्चों को स्कूल बस में बैठा आते हैं"


आप सभी के स्नेहिल प्रतिकियाओं की
प्रतीक्षा में
 मैं मीना शर्मा
मूलतः राजस्थान से,मुंबई में जन्मी,पली बढ़ी।हिंदी में एम. ए. और 
बी. एड. किया। उच्च माध्यमिक कक्षाओं और जूनियर कालेज में हिंदी व मराठी का अध्यापन कर रही हूँ। प्रकृति से जुड़े रहना अच्छा लगता है। भावुक व संवेदनशील हूँ। लिखने से भी ज्यादा पढ़ने का शौक है।
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...