१३ दिसंबर २०१७
।।शुभ भोर वंदन।।
जाड़ों में भोर की आंगन में छनती धूप और चूल्हे पर उबलती चाय से उठता धुआं ,
पत्तियों की महक सच..ये आलम ही कुछ और है
पत्तियों की महक सच..ये आलम ही कुछ और है
तो फिर आज चाय की चुस्की के साथ आनंद लेते हैं शब्दावलियों की लड़ियाँ
जिनमें अहसास भी बदलते रहतें हैं..
जिनमें अहसास भी बदलते रहतें हैं..
प्रस्तुत है आज की लिंक जो अकेली नहीं जमावड़ा है चर्चाओं का ...✍
रचनाकारों के नाम क्रमानुसार पढे..
आदरणीया सविता मिश्रा जी, आदरणीया अपर्णा वाजपेयी जी , आदरणीया शालिनी कौशिक जी,
आदरणीया शकुंतला जी , आदरणीया वंदना रामासिंह जी , आदरणीय चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ जी..
जिधर देखती हूँ
आदरणीया सविता मिश्रा जी, आदरणीया अपर्णा वाजपेयी जी , आदरणीया शालिनी कौशिक जी,
आदरणीया शकुंतला जी , आदरणीया वंदना रामासिंह जी , आदरणीय चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ जी..
गम की परछाइयाँ है
मुहब्बत की डगर में
बस नफरत की खाइयाँ है !!
दुःख को ही बना लिया है
हमने अपना
खुशी तो लगती है
﹏
﹏
तुम्हारी पिटाई से,
लगातार रिसते ख़ून के धब्बे,
नीलशाह, अनगिनत ज़ख्म..
﹏
﹏
एक नारी की सफलता उसके घर परिवार में बसती है उसकी सशक्तता तभी है जब उसका घर पूरी तरह से सुख से संपन्न हो और ये तभी होगा जब वह सही राहों पर चले .पुरुष वर्ग से लोहा ले किन्तु उसके गुणों पर चलकर नहीं बल्कि अपने प्रकृति प्रदत्त गुणों को अपनाकर .तभी ये कहा जायेगा और कहा जा सकेगा -
पीर के मेघा पलकों में छाए मगर, अश्रु मोती के किंचित धरा पर गिरे
नेह के दीप को बुझने न दो,पथ में चाहें जितना अंधेरा घिरे
नन्हा अभिभावक
रोजगार की तलाश में घूमते
घुमक्कड़ लोगों के अस्थाई से डेरे इस बार भी विद्यालय की सीमा के आसपास
दिखाई दिए, तो कुछ सहकर्मियों ने उन डेरों के बच्चों को स्कूल से जोड़ने का
उपक्रम किया | उन बच्चों के रहन सहन तौर-तरीकों को लेकर कुछ लोग असहज
भी थे लेकिन धीरे-धीरे नियमित आने वाले बच्चों के स्वभाव और तौर-तरीकों में परिवर्तन लाने में शिक्षकवृंद सफल भी हुआ |
घुमक्कड़ लोगों के अस्थाई से डेरे इस बार भी विद्यालय की सीमा के आसपास
दिखाई दिए, तो कुछ सहकर्मियों ने उन डेरों के बच्चों को स्कूल से जोड़ने का
उपक्रम किया | उन बच्चों के रहन सहन तौर-तरीकों को लेकर कुछ लोग असहज
भी थे लेकिन धीरे-धीरे नियमित आने वाले बच्चों के स्वभाव और तौर-तरीकों में परिवर्तन लाने में शिक्षकवृंद सफल भी हुआ |
नहीं शबनम था या शोला नहीं था
पता सबको है तू क्या क्या नहीं था
तुझे हम जानते हैं जाने कब से
तू था बदनाम पर ऐसा नहीं था
........................
एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के
अगले सोमवारीय विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का
लिंक हमें आगामी शनिवार की शाम तक प्रेषित करें। आप हम तक सूचना पहुँचाने के लिए
ब्लॉग सम्पर्क फार्म का उपयोग करे...
तो आइये एक कारवां बनायें।
एक मंच, सशक्त मंच !
﹏﹏
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एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के
अगले सोमवारीय विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का
लिंक हमें आगामी शनिवार की शाम तक प्रेषित करें। आप हम तक सूचना पहुँचाने के लिए
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तो आइये एक कारवां बनायें।
एक मंच, सशक्त मंच !
﹏﹏
अब समय है विराम का..
।।इति शम।।
पम्मी सिंह
धन्यवाद..✍




