आप सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
बस दो दिन की दूरी
पल होंगे सिंदूरी
पलाश फले
जंगल के दिल में
अनल जले।
हाइकु
माँ है महान
पूजा जीवन की
करें सम्मान।
हाइकु
चरखी घूमी
चिपकी चिंगारियाँ
गगन सजा।
हाइकु
मेरी जवानी
कटे हुये पंखों की
एक निशानी।
हाइकु
खोलो कमरे
आने दो धूप हवा
मिटे सीलन ।
फिर मिलेंगे