ॐ भानवे नम:
" सावन की फुहारें
तीज का त्योहार
ठंडी- ठंडी बौछारों में पवन चले घनघोर
पकड़ हरियाली की वार
झूलता है आज मेरा मन..
अरमानों के पंख सजा कर
भीग उठा अंतरमन
दे जाती है..
"हर चेहरे पर रुनाइयों का वो निखार" ..
"
सभी को नमस्कार एवम् शुभेच्छा..
आज दिनांक २६ जुलाई २०१७
आप सभी को हरियाली तीज की बधाइयां
आनेवाली पीढी को पर्व त्योहार से
सम्बंधित जानकारी मिलती रहनी चाहिए..
सावन माह में मनाया जाने वाला हरियाली
पर्व दंपतियों के वैवाहिक जीवन में
समृद्धि, खुशी
और तरक्की का प्रतीक है।
आज थोड़ी जल्दी है
तीज के कार्यक्रमों का आयोजन के साथ
मेहंदी प्रतियोगिता,
.
साड़ी, चुडी़ बांधने की प्रतियोगिता, नृत्य, झूला
और इन सबसे उपर जलपान का आयोजन...
.
सजने सवरने की ....
इस पर तो महिलाओं का तो अधि...
(पूरी लिखने क्या
जरूरत है..)
चलिए ये तो हुई त्योहारों की बातें..
अब लिंक पर गौर फरमाते है
ब्लॉग मेरी स्याही के
रंग से मधुलिका पटेल द्वारा रचित खूबसूरत रचना...
धूप का टुकड़ा
बहुत देर ठहरता है
उसे पता है
अब मुझे काफी देर
यहीं वक़्त गुज़ारना
है
क्योंकि वह शाम की
ढलती धूप जो होती है
सुनिये मेरी भी.... ब्लॉग से
प्रवीण जी रचना..
नया शहर है मेरे लिये, कल देर
शाम यों ही एक्सप्लोर करने निकला, एक बड़ी, मात्र
नमकीन की दुकान दिखी तो याद आया कि नमकीन
ब्लॉग उलूक
टाइम्स से सुशील जोशी जी की कृति
तुझे अपनी
खींचनी हैं
लकीरें
मुझे अपनी
खींचने दे
ब्लॉग पराया देश से हृदयस्पर्शी कहानी
साध्यबेला.
. . सुबह से तीन बार पढ़ चुके ईमेल पर एक बार
पुनः देवव्रत की निगाहें दौड़ने
लगी थीं. लिखा था- “पापा, कल दीपक
चाचा आए थे. उनसे पता चला, पिछले डेढ़ वर्ष से आपने अपने घर में एक
पति-पत्नी को
किराएदार के रूप में रखा हुआ है और वे दोनों
आपका बहुत ख़्याल रखते हैं. आजकल समय
बहुत ख़राब है
पापा. ज़रा सोचिए, कोई
ब्लॉग स्वप्न मेरे से दिगम्बर नासवा जी द्वारा रचित
क्या सही क्या गलत ...
खराब घुटनों के साथ रोज़
चलते रहना
ज़िंदगी की जद्दोजहद नहीं दर्द है उम्र भर का ...
एक ऐसा सफ़र जहाँ मरना
होता है रोज़ ज़िंदगी को ... ऐसे में ...
सही बताना क्या में सही हूँ
श्रृंगारित प्रकृति उत्सव की कामना के
साथ -साथ
साथ -साथ
शब्दों के समीक्षात्मक फुहारों से
लिंक को भिगोते रहे ..
इति
धन्यवाद
पम्मी



