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शनिवार, 22 जुलाई 2017

736.. .स्पेशल केस


सबको यथायोग्य
प्रणामाशीष

बरसात का मौसम है
नाक गला भले बंद हो

दिमाग खुला रखें बाबा जादू टोना लिखिए
ओझा जन्तर मन्तर  लिखिए।।
माना कि सरकार बुरे हैं
फिर भी हद के अन्दर लिखिए।।




झंझावात है कभी आंसू आ जाते कभी सूख जाते. इस बीच कब अंतिम संस्कार हो गया,
चौथा, तेरहवीं, पूजा, हवन भी हो गया पता ही नहीं लगा.
हरिद्वार में गंगा स्नान हो गया और उसके बाद पेंशन का काम भी करवा दिया गया.
अब मिसेज़ रामनाथ घर में अकेली रह गईं और कुछ दिन अकेले रहना चाहती भी थीं.
उन्हें अब घर शांत नहीं सुनसान और खाली खाली लगने लगा.
रह रह के ख़याल आने लगा की यहीं रहूँ या किसी बेटा बेटी के साथ?




दीवारें हमारी दुनिया के लोगों से
भरी पड़ी है दूसरी दुनिया पर
सामंजस्य स्थापित करना
बहुत ही कठिन है
दूसरों के दुःख सुन कर
समझ कर अपना दुःख
तिनका सा लगता है




स्पेशल केस "और क्या। आई कांट बिलीव
कोई ऐसा कोम्बिनेशन भी पहन सकता है।
पथैटिक। बदलो फटाफट। रूको मैं ही निकाल कर लाती हूँ ।"
"अरे पहले नाश्ता तो दे दे। "
"रूको तो एक मिनट ही तो लगेगा ।
मैं निकाल रही हूँ तुम फटाफट बदल लेना। फिर नाश्ता लगाती हूँ ।"
कहते हुए सुम्मी शर्ट लेने अंदर चली गई ।
और रोहित बेचारा शर्ट के बटन खोलते हुए सोच रहा है




कमजोरी को बनाई ताक़तजब ममता 2007 के बाद घर से बाहर निकलने लगीं
तो उनकी माँ ने उन्हें यही नसीहत दी कि,
'' बेटा, आगे बढ़ना है तो कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना."
 उसके बाद ममता पेंटिंग की दुनिया में पूरी तरह से रम गयीं.
गोलारोड स्थित एक निजी संस्था और पाटलिपुत्रा के उपेंद्र महारथी संस्था में
आज भी ममता करीब 200 -300 महिलाओं और
लड़कियों को मिथिला पेंटिंग का प्रशिक्षण दे रही हैं.

><><
फिर मिलेंगे




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