शुभ रविवार....
आज मुझे काम पर लगा दिया गया..
आज की मेरी पसंदीदा रचनाएँ....

"सुघड़ गृहणी ".......रेवा टिबड़ेवाल
आँखों से अब
आँसू नहीं बहते
जज़्ब हो गए हैं कोरों मे ........
दिल भी अब
दुखता नहीं
बांध दिया है सिक्कड़ों से

"सुघड़ गृहणी ".......रेवा टिबड़ेवाल
आँखों से अब
आँसू नहीं बहते
जज़्ब हो गए हैं कोरों मे ........
दिल भी अब
दुखता नहीं
बांध दिया है सिक्कड़ों से
अनवरत ताक रही हूँ
आसमान के वर्तमान को या
अपने अतीत को
और उन छवियों में
अपनों को तलाशती
मैं तुम्हें देख पा रही हूँ

आशाएं.....कमलकिशोर पाण्डेय
'स्व' तक सीमित और दिखावे वाले
महानगर में भी
बेहोशी आ जाने पर
अपने सहयात्री को
पानी दे देता
कोई अनजान शख्स
आसमान के वर्तमान को या
अपने अतीत को
और उन छवियों में
अपनों को तलाशती
मैं तुम्हें देख पा रही हूँ

आशाएं.....कमलकिशोर पाण्डेय
'स्व' तक सीमित और दिखावे वाले
महानगर में भी
बेहोशी आ जाने पर
अपने सहयात्री को
पानी दे देता
कोई अनजान शख्स
कुछ भी व्यर्थ नहीं....श्वेता सिन्हा
कुछ भी व्यर्थ नहीं जीवन में
हर बात में अर्थ को पा लो
चंद साँसों की मोहलत मिली है,
चाहो तो हर खुशी तुम पा लो
कुछ भी व्यर्थ नहीं जीवन में
हर बात में अर्थ को पा लो
चंद साँसों की मोहलत मिली है,
चाहो तो हर खुशी तुम पा लो

सफल आदमी.......भास्कर चौधुरी
और
सामाने बैठी औरतों की
ज़ोरदार तालियों के बीच
वह उतर आया
मंच से आहिस्ते आहिस्ते
झूमते झूमते !!

और
सामाने बैठी औरतों की
ज़ोरदार तालियों के बीच
वह उतर आया
मंच से आहिस्ते आहिस्ते
झूमते झूमते !!

शब्द-शब्द हाइकू .....अनुपमा त्रिपाठी
शब्दों से प्रभु ...
सजादो मेरा मन ....
कविता खिले ...
व्यथा मुखर ....
शब्द हुए प्रखर .....
काव्य निखर .....

अर्धसत्य...मीना शर्मा
कैसे समझूँ मैं तुम्हें ?
कैसे जानूँ ?
मन घुट रहा है सवालों से !
अच्छा, इतना तो बता दो,
तुम्हें सत्य कैसे कहूँ ?
और 'अर्धसत्य' कहूँ,
तो मंजूर होगा क्या तुम्हें ?
उलूक उवाच...डॉ. सुशील जोशी

अब जनाब क्या
सारी की सारी बात
हम ही आपको
बताते चले जायेंगे
कुछ बातें आप
अपने आप भी
पता नहीं लगायेंगे
पता लगाईये और
हमें भी बताइये
कुछ पैसा खर्च
वर्च कर जाइये
हवाई जहाज से
यात्रा कर के आईय़े
आप जरूर किसी
ना किसी ऎसे
कुत्ते से टकरायेंगे
शब्दों से प्रभु ...
सजादो मेरा मन ....
कविता खिले ...
व्यथा मुखर ....
शब्द हुए प्रखर .....
काव्य निखर .....

अर्धसत्य...मीना शर्मा
कैसे समझूँ मैं तुम्हें ?
कैसे जानूँ ?
मन घुट रहा है सवालों से !
अच्छा, इतना तो बता दो,
तुम्हें सत्य कैसे कहूँ ?
और 'अर्धसत्य' कहूँ,
तो मंजूर होगा क्या तुम्हें ?
उलूक उवाच...डॉ. सुशील जोशी
अब जनाब क्या
सारी की सारी बात
हम ही आपको
बताते चले जायेंगे
कुछ बातें आप
अपने आप भी
पता नहीं लगायेंगे
पता लगाईये और
हमें भी बताइये
कुछ पैसा खर्च
वर्च कर जाइये
हवाई जहाज से
यात्रा कर के आईय़े
आप जरूर किसी
ना किसी ऎसे
कुत्ते से टकरायेंगे

