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शुक्रवार, 26 मई 2017

679..कोशिश करें लिखें, भेड़िये अपने अपने अन्दर के थोड़े थोड़े लिखना आता है सब को सब आता है

सादर अभिवादन
नौतपा लग चुका है कल से..
नौ दिन..नौ नक्षत्र...
कहा जाता है कि इन नौ दिनों में
जिस भी नक्षत्र में बारिश हो गई तो
पूरे वर्षा-काल में उस नक्षत्र में बारिश नही होगी
चलिए चलते हैं पसंदीदा रचनाओं की ओर...

post-feature-image
कल वट सावित्री का पर्व था.....ज्योति देहलीवाल
एक मान्यता के अनुसार वटसावित्री व्रत के दिन महिलाएं शिव-पार्वती जी से प्रार्थना करती है कि “हे प्रभु, सात जन्मों तक हमें यहीं पति मिलें!” लेकिन अपने पति की खुशी को सर्वोपरी मानने वाली हम महिलाएं इस बात कि ओर ध्यान क्यों नहीं देती कि हमारे पति महोदय क्या चाहते है? पति महोदय की खुशी किस बात में है? ईश्वर से सात जन्मों तक वहीं पति मांग कर, क्या हम महिलाएं उन पर जुर्म नहीं करती? क्योंकि ज्यादातर (सभी नहीं) पुरुषों की इच्छा यहीं रहती है कि उन्हें हर जन्म में अलग-अलग पत्नियाँ मिले! 




स्किपिंग रोप
कूदते समय रस्सी
ऊपर से उछल कर
पैरों के नीचे से
जाती है निकल 
जगाती है
अजब सनसनाती सिहरन

घर शब्द छ: घणो छोटो
अर्थ इको साँथरों मोटो।

इम रैव एक परिवार
बिना बिक सूनो संसार।

जठै सारा साँकला रैव
बठै सदा खुशहाली रैव। 



हिमालय दर्शन 


अंजनी महादेव
सोलांग वैली.....हर्षिता विनय जोशी
एक बहुत ही सुन्दर जगह रास्ते में पड़ी , जगह क्या थी  हरी घास का एक मैदान। जिसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने हरे रंग का मखमली कालीन बिछा दिया हो और पार्श्व में एक  ओर देवदार के पेड़ थे और दूसरी ओर विशाल हिमालय। इस जगह को देखते ही मुंह से निकला गाड़ी रोको और हम निकल गए बाहर। कुछ देर यहाँ पर बैठे और जगह का आनंद लिया। एक और उदाहरण यहाँ देखने को मिला वो ये था कि लोग जगह का चुनाव एक दूसरे को देखकर भी करते हैं। जिस समय हम आये तो हमारी गाड़ी के अतिरिक्त और कोई गाड़ी यहाँ नही थी पर हमारे जाने से पहले गाड़ियों का जमावड़ा सा ही  लग गया था इधर। इसी को कहा जाता  है भेड़चाल ,खैर जो भी हो जगह बहुत सुन्दर थी।



पापा...रेवा टिबड़ेवाल
पापा मुझे दर्द बहुत होता है 
जब आपकी तस्वीरों 
पर माला देखती हूँ 
मुझे दर्द बहुत होता है 
जब माँ को तन्हाइयों से 
लड़ते देखती हूँ 




मन की बात 
जैसा कुछ 
हो जाता है 

ऐसा हो जाना 
कुछ अजूबा
नहीं होता है 

नंगा हो जाना 
हर किसी को 
आसानी से 
कहाँ आ 
पाता है 

आज्ञा दें यशोदा को
फिर मिलेंगे






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