सादर अभिवादन...
पहली बार पाँच लिंकों का आनन्द में
पाठकों की पसंद के अन्तर्गत
आपके समक्ष पेश करती हूँ...
पहली बार पाँच लिंकों का आनन्द में
पाठकों की पसंद के अन्तर्गत
आपके समक्ष पेश करती हूँ...
कविता दीदी (कविता रावत) की पसंद की रचनाएँ..

यूँ ही कोई किसी की सुध नहीं लेता
बिन मांगे कोई किसी को कब देता
जब तक विप्र सुदामा नहीं गए मांगने
सर्वज्ञ कृष्ण भी कब गए उनके आंगने
महलों का सुख, झोपड़ी को है जलाता
वे कलियाँ जो भ्रमित होकर
अपने को पूर्ण खिला
समझ बैठती है
पड़ जाती है
कुछ असामाजिक तत्वों के हाथ
उनका इस कदर खिल जाना
बन जाता है अभिशाप

शादी-ब्याह की मौज-मस्ती में
“जब-जब मुझे किसी की शादी का निमंत्रण पत्र मिलता है
तब-तब मुझे 30 नवम्बर का वह दिन खूब याद आता है।
जब दुल्हन बन मंच पर बैठी तो लगा रानी बन गई हूँ।
अब किससे कहूँ रोबोट बनी उस रानी को ढूंढ़ रही हूँ।"

संगति का प्रभाव
हँसमुख साथ मिल जाय तो सुनसान रास्ता भी आराम से कट जाता है
अच्छा साथ मिल जाने पर कोई रास्ता लम्बा नहीं रह जाता है
शिकारी पक्षी कभी एक साथ मिलकर नहीं उड़ा करते हैं
जो भेड़ियों की संगति में रहते हैं, वे गुराना सीख जाते हैं

असहाय वेदना
वो पास खड़ी थी मेरे
दूर कहीं की रहने वाली,
दिखती थी वो मुझको ऐसी
ज्यों मूक खड़ी हो डाली।
पलभर उसके ऊपर उठे नयन
पलभर नीचे थे झपके,
पसीज गया यह मन मेरा
जब आँसू उसके थे टपके।
........

कविता दीदी का परिचय उन्हीं के शब्दों में...
मैं शैल-शिला, नदिका, पुण्यस्थल, देवभूमि उत्तराखंड की संतति, प्रकृति की धरोहर ताल-तलैयों, शैल-शिखरों की सुरम्य नगरी भोपाल मध्यप्रदेश में निवासरत हूँ। मैंने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में स्कूल शिक्षा विभाग, भोपाल में कर्मरत हूँ। भोपाल गैस त्रासदी की मार झेलने वाले हजारों में से एक हूँ। ऐसी विषम परिस्थितियों में मेरे अंदर उमड़ी संवेदना से लेखन की शुरुआत हुई, शायद इसीलिए मैं आज आम आदमी के दुःख-दर्द, ख़ुशी-गम को अपने करीब ही पाती हूँ, जैसे वे मेरे अपने ही हैं। ब्लॉग मेरे लिए एक ऐसा सामाजिक मंच है जहाँ मैं अपने आपको एक विश्वव्यापी परिवार के सदस्य के रूप में देख पा रही हूँ, जिस पर अपने मन/दिल में उमड़ते-घुमड़ते खट्टे-मीठे, अनुभवों व विचारों को बांट पाने में समर्थ हो पा रही हूँ।
हम कविता दीदी के आभारी हैं
हमारा अगला अंक गुरुवार दिनांक 11 मई 2017 को प्रकाशित होगा
रचनाओं के लिंक्स आमंत्रित है
शादी-ब्याह की मौज-मस्ती में
“जब-जब मुझे किसी की शादी का निमंत्रण पत्र मिलता है
तब-तब मुझे 30 नवम्बर का वह दिन खूब याद आता है।
जब दुल्हन बन मंच पर बैठी तो लगा रानी बन गई हूँ।
अब किससे कहूँ रोबोट बनी उस रानी को ढूंढ़ रही हूँ।"

संगति का प्रभाव
हँसमुख साथ मिल जाय तो सुनसान रास्ता भी आराम से कट जाता है
अच्छा साथ मिल जाने पर कोई रास्ता लम्बा नहीं रह जाता है
शिकारी पक्षी कभी एक साथ मिलकर नहीं उड़ा करते हैं
जो भेड़ियों की संगति में रहते हैं, वे गुराना सीख जाते हैं
असहाय वेदना
वो पास खड़ी थी मेरे
दूर कहीं की रहने वाली,
दिखती थी वो मुझको ऐसी
ज्यों मूक खड़ी हो डाली।
पलभर उसके ऊपर उठे नयन
पलभर नीचे थे झपके,
पसीज गया यह मन मेरा
जब आँसू उसके थे टपके।
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कविता दीदी का परिचय उन्हीं के शब्दों में...
मैं शैल-शिला, नदिका, पुण्यस्थल, देवभूमि उत्तराखंड की संतति, प्रकृति की धरोहर ताल-तलैयों, शैल-शिखरों की सुरम्य नगरी भोपाल मध्यप्रदेश में निवासरत हूँ। मैंने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में स्कूल शिक्षा विभाग, भोपाल में कर्मरत हूँ। भोपाल गैस त्रासदी की मार झेलने वाले हजारों में से एक हूँ। ऐसी विषम परिस्थितियों में मेरे अंदर उमड़ी संवेदना से लेखन की शुरुआत हुई, शायद इसीलिए मैं आज आम आदमी के दुःख-दर्द, ख़ुशी-गम को अपने करीब ही पाती हूँ, जैसे वे मेरे अपने ही हैं। ब्लॉग मेरे लिए एक ऐसा सामाजिक मंच है जहाँ मैं अपने आपको एक विश्वव्यापी परिवार के सदस्य के रूप में देख पा रही हूँ, जिस पर अपने मन/दिल में उमड़ते-घुमड़ते खट्टे-मीठे, अनुभवों व विचारों को बांट पाने में समर्थ हो पा रही हूँ।
हम कविता दीदी के आभारी हैं
हमारा अगला अंक गुरुवार दिनांक 11 मई 2017 को प्रकाशित होगा
रचनाओं के लिंक्स आमंत्रित है