06 दिसम्बर सन् 1992
ये इमारत आज मौजूद नहीँ है
क्यों हुआ..कैसे हुआ..
क्यों हुआ..कैसे हुआ..
ये कुछ अमुक लोगों का ही विदित है
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सादर अभिवादन स्वीकार करें
आज की पसंदीदा रचनाएँ संक्षिप्त में.....
..अनुकरणीय..



फूल और काँटे
आज का शीर्षक...
आज से चौबीस वर्ष पहले
धार्मिक उन्माद के चलते
ऐतिहासिक इमारत गिरा दी गई
अब उस जगह पर सिर्फ मैदान है
जहाँ लोग पूजा भी करते हैं
और कतिपय लोग पूजन स्थल से दूर
धार्मिक उन्माद के चलते
ऐतिहासिक इमारत गिरा दी गई
अब उस जगह पर सिर्फ मैदान है
जहाँ लोग पूजा भी करते हैं
और कतिपय लोग पूजन स्थल से दूर
बगल के मैदान मे नमाज़ भी पढ़ते हैं.
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बात साल 1949 की है. आजाद भारत की उम्र कुल मिलाकर दो साल ही हुई थी. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू अभी भी भारत के विचार को साकार करने में लगे हुए थे, और उनके सहयोगी सरदार वल्लभभाई पटेल देश की सीमाओं को परिभाषित कर रहे थे. 1949 में देश भले ही आजाद हो गया था लेकिन विभाजित भारत के लोग अभी भी विभाजन की त्रासदी में तार-तार हुए सामाजिक तानेबाने के चीथड़े को समेटने की कोशिश कर रहे थे. इन्हीं सबके बीच उत्तर प्रदेश में जमीन तैयार की जा रही थी 22 दिसंबर की रात को अयोध्या घेरने की.
सुबह करीब 3 बजे अचानक से बिजली चमकी और श्री राम बाबरी मस्जिद में प्रकट हो गए. चमत्कार मानकर विश्वास कर लिया गया यह वाकया “राम जन्मभूमि को आजाद करवाने” की दिशा में हिंदुओं के “सदियों लंबे” संघर्ष में पहला महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ.
दावा किया जाता है कि
बाबरी मस्जिद को बाबर के सिपहसालार मीर बाकी ने साल 1528 में श्रीराम जन्मभूमि पर बने मंदिर को तोड़कर बनवाया था.
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आज्ञा देँ दिग्विजय को
सादर..
