सादर अभिवादन
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इटली का प्रसिद्ध शहर
लाजियो ..
गार्डन ऑफ लाजियो
इटली का गार्डन ऑफ लाजियो, राक्षसों के पार्क भी कहा जाता है.
यह बागीचा गार्डन जानबूझ कर सुंदर नहीं बनाया है
इसकी अनोखी कलाकृतियां डरावना या शोक का भाव पैदा करती हैं.
इसके इस तरह बनने के पीछे अपना इतिहास है.
लेकिन यह अपनी तरह का दुनिया में इकलौता बागीचा है.
कल दिनाक 6 जुलाई के नवभारत के पेज नम्बर छः पर देखें
कुछ सोचो
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पनीली भोर में
लौह दरवाज़े के
एक खांचे में बैठी
कलछौंही
नन्हीं चिड़िया का स्वर
जब लगे
राग आसावरी-सा
किया समर्पण त्याग,जले बाती जैसे,
करे भाव अँकवार,तुम्हारी आँखों में।।
जीवन की जब धूप,जलाती थी काया
पीड़ा का उपचार,तुम्हारी आँखों में।।
बिजली की दे दो चपलता
और मेघ की गर्जना
सितारों की दे दो चमक
और चांद की शीतलता ,
बूंदों को उपहार की
देकर यह श्रृंखला
करने फिर से धरा तृप्त
कर दो विदा ए आसमां
छन में यह गिर जाएगा .. . . . . . . . .
डग भरते मग कहिअ एक मिलआ सुबुध सुजान ।
सुनहु राजन मरनि निकट नहि कछु तुमहि भयान ll
जीवन दिवस साति है मम मरनि अजहुँ दूर l
छन भँगुराहि तव जिउना सोच करौ आतूर ॥
उनके साथ प्रैम में छोटे बच्चे को लेकर आई बारह तेरह साल की एक लड़की भी थी। वेशभूषा से वो बच्चे की सेविका लग रही थी। बच्चा प्रैम में सो रहा था और वो लड़की दूसरी छोटी मेज पर बैठी उन सबको खाते टुकुर-टुकुर देख रही थी। उसके सूखे होंठ, मुरझाया चेहरा और कातर बड़ी-बड़ी आँखें देख कर मन बहुत बेचैन हो उठा। मेरा मन कर रहा था उसे अपनी टेबल पर लाकर पेट भरके खिला- पिला दूँ, परन्तु यह संभव नहीं था।उन सबकी प्लेटें मंहगे, लजीज बुफे के पकवानों से भरी थीं, जिसे वे भर-भर कर लाते और आधा खाते, आधा छोड़ते और फिर दूसरी और तीसरी प्लेट भर लाते।
आज बस
सादर वंदन






