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सोमवार, 30 जून 2025

4435 ...नुन्नोऽनुन्नो ननुन्नेनो नानेना नुन्ननुन्ननुत्

सादर अभिवादन
आज जून मास का अंतिम दिन
....
मैं संस्कृत हूँ


पूरे विश्व में केवल एक संस्कृत ही ऐसी भाषा है जिसमें केवल एक अक्षर से ही पूरा वाक्य लिखा जा सकता है, किरातार्जुनीयम् काव्य संग्रह में केवल “न” व्यंजन से अद्भुत श्लोक बनाया है और गजब का कौशल्य प्रयोग करके भारवि नामक महाकवि ने थोड़े में बहुत कहा है...

न नोननुन्नो नुन्नोनो नाना नानानना ननु।
नुन्नोऽनुन्नो ननुन्नेनो नानेना नुन्ननुन्ननुत्॥

अर्थात: जो मनुष्य युद्ध में अपने से दुर्बल मनुष्य के हाथों घायल हुआ है वह सच्चा मनुष्य नहीं है। ऐसे ही अपने से दुर्बल को घायल करता है वो भी मनुष्य नहीं है। घायल मनुष्य का स्वामी यदि घायल न हुआ हो तो ऐसे मनुष्य को घायल नहीं कहते और घायल मनुष्य को घायल करें वो भी मनुष्य नहीं है। वंदेसंस्कृतम्!

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(भारवि (छठी शताब्दी) संस्कृत के महान कवि)
भारवि (छठी शताब्दी) संस्कृत के महान कवि हैं। वे अर्थ की गौरवता के लिये प्रसिद्ध हैं ("भारवेरर्थगौरवम्")। किरातार्जुनीयम् महाकाव्य उनकी महान रचना है। इसे एक उत्कृष्ट श्रेणी की काव्यरचना माना जाता है। इनका काल छठी-सातवीं शताब्दी बताया जाता है। यह काव्य किरातरूपधारी शिव एवं पांडुपुत्र अर्जुन के बीच के धनुर्युद्ध तथा वाद-वार्तालाप पर केंद्रित है। महाभारत के वन पर्व पर आधारित इस महाकाव्य में अट्ठारह सर्ग हैं। भारवि सम्भ दक्षिण भारत के महर्षि कवि के वंश भट ब्राह्मण भटनागर कायस्थ कुल में जन्मे थे। उनका रचनाकाल पश्चिमी गंग राजवंश के राजा दुर्विनीत तथा पल्लव राजवंश के 
राजा सिंहविष्णु के शासनकाल के समय का है।

कवि ने बड़े से बड़े अर्थ को थोड़े से शब्दों में प्रकट कर अपनी काव्य-कुशलता का परिचय दिया है। कोमल भावों का प्रदर्शन भी कुशलतापूर्वक किया गया है। इसकी भाषा उदात्त एवं हृदय भावों को प्रकट करने वाली है। प्रकृति के दृश्यों का वर्णन भी अत्यन्त मनोहारी है। भारवि ने केवल एक अक्षर ‘न’ वाला श्लोक लिखकर अपनी काव्य चातुरी का परिचय दिया है।
*******
अस्य ....
“आषाढस्य प्रथम दिवसे”

तस्मिन्नद्रौ कतिचिदबलाविप्रयुक्त: स कामी,
नीत्वा मासान्कनकवलयभ्रंशरिक्तप्रकोष्ठ: ।
आषाढस्य प्रथम दिवसे मेघमाश्लिष्टसानुं,
वप्रक्रीडापरिणतगजप्रेक्षणीयं ददर्श ।

कुबेर के उस सेवक (हेममाली) यक्ष की नयी-नयी शादी हुई थी, सबेरे उठने में देर हो जाती थी| 
इसलिए वह रात्रि को ही कमल के पुष्प तोड़ कर रख लेता और जब कुबेर शिव-पूजा पर बैठते तब 
फूलों की टोकरी पहुंचा देता ।

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“वर्षा ऋतु की स्निग्ध भूमिका
प्रथमदिवस आषाढ-मास का
देख गगन में श्याम घनघटा
विधुर यक्ष का मन जब उचटा
खडे-खडे तब हाथ जोड़कर
चित्रकूट के सुभग शिखर पर
उस बेचारे ने भेजा था,
जिनके ही द्वारा संदेशा
उन पुष्करावर्त मेघों का
साथी बन कर उड़ने वाले
कालिदास ! सच सच बतलाना
पर-पीडा से पूर-पूर हो
थक-थक कर और चूर-चूर हो
अमल-धवल गिरि के शिखरों पर
प्रियवर ! तुम कब तक सोये थे ?
रोया यक्ष कि तुम रोये थे ?
कालिदास सच-सच बतलाना !
…….बाबा नागार्जुन

और भी है... ब्लॉग पर जाकर पढ़िेएगा

देखें कुछ रचनाएं


माँ तुम मुझको आज दिला दो
सपनो वाली मेरी गुड़िया
वो मुझको सुन्दर लगती है
माँ तुम मुझको आज दिला दो
सपनो वाली मेरी गुड़िया
वो मुझको सुन्दर लगती है




सुलगता रहा इक शरर धीरे धीरे
जलाता रहा वो ये घर धीरे धीरे

मचाया हवाओं ने कुहराम ऐसा
गिरा टूट कर हर समर धीरे धीरे




जो
कुछ नहीं चाहता
केवल
बीतते हुए
कुछ समय में से
दो बातें
और
दो पल।
ये प्रेम ही तो है



मही वंदिनी करती गुहार
करो बैर न यूँ ही प्रहार
करते रहे घायल ये मन
चिथड़े किये आँचल-वसन
नहीं शोभता जननी पर वार




बहुविधि समझाया उनको मैंने,
कहा दूत द्वारिका से  है आया।
जब मांगी  विदा हाथ जोड़कर,
दहाड़  मार  रोई  सिगरी नगरी।।

********
शब्द मुस्कुराते हैं,
शब्द खिलखिलाते हैं,
शब्द गुदगुदाते हैं,
शब्द मुखर हो जाते हैं
शब्द प्रखर हो जाते हैं
इतना होने के बाद भी
शब्द चुभते हैं
*********
आज बस
सादर वंदन

शनिवार, 22 मार्च 2025

4435 ...शब्द बहते, गंगोत्री है, मौन की ....

 सादर अभिवादन

आज विश्व जल दिवस



यह निर्विवाद सत्य है कि सभी जीवित प्राणियों की उत्पत्ति जल में हुई है। वैज्ञानिक अब पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर पहले पानी की खोज को प्राथमिकता देते हैं। पानी के बिना जीवन जीवित ही नहीं रहेगा। इसी कारणवश अधिकांश संस्कृतियाँ नदी के पानी के किनारे विकसित हुई हैं। इस प्रकार ‘जल ही जीवन है’ का अर्थ सार्थक है। दुनिया में, 99% पानी महासागरों, नदियों, झीलों, झरनों आदि के अनुरूप है। केवल 1% या  इससे भी कम पानी पीने के लिए उपयुक्त है। हालाँकि, पानी की बचत आज की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। केवल पानी की कमी पानी के अनावश्यक उपयोग के कारण है। बढ़ती आबादी और इसके परिणामस्वरूप बढ़ते औद्योगीकरण के कारण, शहरी मांग में वृद्धि हुई है और पानी की खपत बढ़ रही है। आप सोच सकते हैं कि एक मनुष्य अपने जीवन काल में कितने पानी का उपयोग करता है,  किंतु क्या वह इतने पानी को बचाने का प्रयास करता है? असाधारण आवश्यकता को पूरा करने के लिए, जलाशय गहरा गया है। इसके परिणामस्वरूप, पानी में लवण की मात्रा में वृद्धि हुई है।



वैश्विक जल संरक्षण के वास्तविक क्रियाकलापों को प्रोत्साहन देने के लिये विश्व जल दिवस को सदस्य राष्ट्र सहित संयुक्त राष्ट्र द्वारा मनाया जाता हैं। इस अभियान को प्रति वर्ष संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की एक इकाई के द्वारा विशेष तौर से बढ़ावा दिया जाता है जिसमें लोगों को जल से संबंधित मुद्दों के बारे में सुनने व समझाने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही विश्व जल दिवस के लिये अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का समायोजन भी शामिल है। इस कार्यक्रम की शुरुआत से ही विश्व जल दिवस पर वैश्विक संदेश फैलाने के लिये थीम (विषय) का चुनाव करने के साथ ही विश्व जल दिवस को मनाने की सारी जिम्मेवारी संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण तथा विकास एजेंसी की हैl

देखें रचनाएं








ठहर कर
एक पल
मादक वसंत
झरने सा
झर झर
बह गया
लहर कर
गाल ऊपर
बाल काले
मोहक छवि
को गढ़ गया




नीले हम आकाश रहे है
नीला निर्मल जल
नीले फूलों से महका है
कलरव करता दल
नीली पहने प्यार चुनरिया
जीवन का हर पल
नीले जल झांका करता है
नित दिन अस्ताचल




उसे बहुत गुस्सा आया। उसने सोचा कि कल गांव वालों की मदद से इस पत्थर को खेत से निकालकर ही दम लेगा। उसने अगले दिन काफी लोगों को खेत में जमा किया। लोगों को देखकर उसने पत्थर को खोदना शुरू किया। दो-तीन बार फावड़ा चलाने पर वह पत्थर बाहर निकल आया।

सबने देखा कि वह पत्थर बहुत ही छोटा था। इतने छोटे पत्थर को देखकर लोगों ने कहा कि इस पत्थर को तुम पहले भी निकाल सकते थे। किसान ने कहा कि मैंने सोचा कि यह बड़ा पत्थर होगा, लेकिन यह तो बहुत छोटा निकला। यदि मैं ऐसा जानता तो पहले ही निकाल दिया होता। बार-बार इतनी चोट क्यों खाता?






शून्य भीतर,
अनहद का नाद,
कौन सुनेगा?

प्यासी मछली,
जग वैतरणी में,
प्यास न बुझी ।

तन का बीज,
मन के तल पर,
खेत हैं मौन।

शब्द बहते
गंगोत्री है मौन की,
सुनेगा कोई?


फिर मिलते हैं
वंदन
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