सादर अभिवादन
देखते ही देखते मास फरवरी
के आधे दिन चुक गए
साल 2025 कुल मिलाकर
45 दिन छोटा हो गया
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तोड़ दूँ गांडिव या तीर अंतिम चलाऊं
हे पार्थ मैं किस ओर जाऊं
मत्स्य यंत्र कौन भेद देगा
धारा विरोध कौन बहेगा
चक्र यूही चलता रहेगा
अटूट शाश्वत समता
जो अर्जित की गई है
पूर्णता की धारा से
जहाँ आश्रय मिलता है
हर तुच्छता की कारा से
वहीं ठिकाना हो सदा मन का
जो स्रोत है हर जीवन का !
खींचती रहती है इक चाह मगर फ़र्क ये है
तुझको बाहर की तरफ़ और मिरे अन्दर मुझको
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सूरज को देख कर ही तवाज़ुन बनाए रख
रंगत है जिस पे एक उरूज-ओ-ज़वाल की
धर्म गुरुओं को प्रजा को अपनी तरफ करने का मौका मिल गया ! उन्होंने वैलेंटाइन को आगे कर राजा क्लैडियस के आदेश की खिलाफत करनी शुरू कर दी ! वैलेंटाइन ने गुप्त रूप से सैनिकों का विवाह करवाना शुरू कर दिया। इस बात की जानकारी जब राजा को हुई तो उसने उनको मौत की सजा सुना दी ! 14 फरवरी 269 को संत वैलेंटाइन को मौत के घाट उतार दिया गया। फिर 496 ई. में पोप ग्लेसियस ने इस दिन को उस संत के नाम पर "सेंट वैलेंटाइन्स डे" घोषित कर दिया।
आंखों के अन्दर है भावों का पानी
मिले नहीं मिलता अभावों का पानी
कहीं एक बूंद भी मिलती नहीं है
मरुथल में मिलता है मुश्किल से पानी
आज बस
वंदन




