सादर नमस्कार
दो दिन बचा है दिसंबर को
और दो ही दिन बचा है 2024 को
कुछ बंद ब्लॉग और है
उसे भी देख लीजिए
ब्लॉगः एक शहर है
2008-2019
ब्लॉगसंचालक- अज्ञात
पंडित जी पूरी सरकार को गालियाँ देते हुए अब अपना बोरिया-बिस्तरा समेट चुके थे। बस, रजिस्टरों पर उनके हस्ताक्षर लेने बाकि थे। मगर वो तो मदिरा में इतने धुत थे कि उनके हस्ताक्षर कैसे कराये जाए ये सोचना पहले जरूरी था। उनको शिवराम जी ने और उनकी घरवाली ने पकड़ा हुआ था वो बहुत नशे में थे।
न दैन्यं न पलायनम्
ब्लॉगरः प्रवीण पांडेय
अंतिम प्रस्तुति अगस्त 2022
साधारण मन और जटिल जन,
सम्यक चिन्तन और विकट क्रम,
बाहर भीतर साम्य नहीं जब,
क्या कर लेगा, बन सज्जन-मन।
ब्लॉगः जाले
ब्लॉगरः पुरुषोत्तम पाण्डेय
सफर नामा 2011 से 2022
अंतिम प्रस्तुति
‘एक बार किसी बात पर नाराज होकर अकबर ने बीरबल को फाँसी की सजा सुना दी. जब बीरबल से उसकी अन्तिम इच्छा पूछी गयी तो उसने कहा, ‘मैं घोड़े को उड़ाने की विद्या जानता हूँ. बादशाह के घोड़े को उड़ना सिखाना चाहता हूँ.” सन्देश अकबर के पास पहुँचा तो उसने पूछा कि “कितना समय लगेगा?” बीरबल ने बताया “पूरा एक साल.” बादशाह ने सहर्ष स्वीकृति दे दी. जेलर ने बीरबल से उत्कंठाबस पूछा, “क्या सचमुच घोड़ा उड़ सकता है?” तब बीरबल ने उत्तर दिया ”एक वर्ष का समय बहुत होता है. इस बीच बादशाह भी मर सकते हैं, मैं भी मर सकता हूँ, या फिर घोड़ा भी मर सकता है, कुछ भी हो सकता है. घोड़ा काबिल हुआ तो जरूर उड़ सकता है.”
ब्लॉगः मुक्ताकाश
ब्लॉगरः आनन्दमोहन ओझा
चल पडा हूं, और चलना है मुझे!
राह लम्बी है, न रुकना है मुझे!!
ब्लॉग का सफर 2009 से 2021
जब तुम प्रयास पूर्वक निचोड़ते हो
शब्दों से अतिरिक्त अर्थ,
शब्दों को अच्छा नहीं लगता,
वे मुँह फुलाकर बैठ जाते हैं
जमील नामा
निवास डिडवाना , राजस्थान
सर पर गठर
गठरी में रोटी
क्या लेकर जा रहे थे
क्या लेकर आए थे
टूटी चप्पल दो जोड़ी कपड़े
कौन थे वो हिन्दुस्तानी ?
निवास डिडवाना , राजस्थान
सर पर गठर
गठरी में रोटी
क्या लेकर जा रहे थे
क्या लेकर आए थे
टूटी चप्पल दो जोड़ी कपड़े
कौन थे वो हिन्दुस्तानी ?
बस
अब मिलेंगे 2025 में
