नमस्कार
सरकार करती हे रोजगार,
बेचती है पानी,
अगली चीज क्या बेचेगी सरकार?
हवा,
सूरज की धूप या
फूलों की खुशबू.
अब बंद ब्लॉगों पर एक नजर
कविता विहंगम
गिरिजेश राव
कुमुद कौमुदी गदा देवी
सहस्त्रार चक्र-सुदर्शन
ब्लॉग गौरैया
हर्षवर्धन
मुरादाबाद
साल 2013 की बात है। मुझे पानी बचाने के लिए स्पैरो अवॉर्ड दिया गया था। इसके बाद मैंने गौरैया के संरक्षण को लेकर काम करने वाले लोगों के साथ भी काम किया। महाराष्ट्र में जो लोग इस अभियान को लेकर काम कर रहे हैं, उनसे मैं कई बार मिला। इस दौरान कई बातें पता चलीं। मैं एक बात मानता हूं कि चींटी से लेकर हाथी तक हर जीव-जंतु जिसे प्रकृति ने बनाया है, वह धरती के संतुलन के लिए जरूरी है। गौरैया भी इन्हीं में से एक है। उसकी संख्या का धीरे-धीरे कम होते जाना, संतुलन के लिए हानिकारक ही नहीं, हमारे जीवन के लिए खतरनाक भी है।
उड़ान
ब्लॉगरः अज्ञात
खुशियों की तलाश में निकले थे हम
लेकिन नसीब में लिखे थे सिर्फ गम
सोचा न था कि वक्त हमें ये दिन दिखाएगा
प्यार से डरकर रहो
बहुत खतरनाक होता है प्यार
ये तोड़ देता है ये समाज की वर्जनाओं को
मिटा देता है जात-पात की लकीरों को
स्त्रियों की मुक्ति के स्वर,
ब्लॉगरः वर्षा
पत्रकार
दिल्ली ,
जब मेरी छह साल की बेटी सोलह की हो जाएगी, तो मैं उसे यह पत्र तोहफे के रूप में दूंगी।
मैं उसे बताऊंगी कि बेटा जन्म देना तो आसान होता है लेकिन पालना मुश्किल।
यूं तो शादी के बाद ही दफ्तर में महिलाओं के प्रति बाकि लोगों का रवैया बदल जाता है।
ब्लॉगः यूं ही कभी
राजीव कुमार झा
समाज शास्त्र के व्याख्याता
भागलपुर , बिहार
दूर क्यों हो पास आओ जरा
देखो गगन से मिल रही धरा
कलियां खिल रही कितने जतन से
चाँद की रौशनी से नहाओ जरा
ब्लॉगः हास्य-व्यंग्य
ब्लॉगरः अज्ञात
2004-2014
वैदिक ने इंटरव्यू लिया, या
हाफ़िज़ ने जबरदस्ती दिया.
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कल फिर




