सादर अभिवादन
ब्लॉग सरदार भाई कुलदीप जी
प्रदर्शनी, मीटिंग व कार्यशाला में
हिस्सा लेने दिल्ली में हैं
सो.. शनिवार तक हम दो ही सरदार हैं
मैं व विभा दीदी.....
उनकी बात छोड़िए..
मैं व वे एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं
प्रस्तुत है...आज की पसंदीदा रचनाएँ...
आप यूं ही अपना आशीष देते रहना....सदा
पापा आपकी यादों से
आज फ़िर मैंने
अपनी पीठ टिकाई है
पलकों पे नमी है ना
मन भावुक हो रहा है
कोई उम्र तय की है क्या तुमने प्यार की...सुषमा वर्मा
क्यों अब इंतजार....
तुम्हारी आँखों में नही दिखता,
क्यों अब वो मुझ पर एतबार,
तुम्हारी बातो में नही मिलता,
ब्लॉग सरदार भाई कुलदीप जी
प्रदर्शनी, मीटिंग व कार्यशाला में
हिस्सा लेने दिल्ली में हैं
सो.. शनिवार तक हम दो ही सरदार हैं
मैं व विभा दीदी.....
उनकी बात छोड़िए..
मैं व वे एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं
प्रस्तुत है...आज की पसंदीदा रचनाएँ...
आप यूं ही अपना आशीष देते रहना....सदा
पापा आपकी यादों से
आज फ़िर मैंने
अपनी पीठ टिकाई है
पलकों पे नमी है ना
मन भावुक हो रहा है
कोई उम्र तय की है क्या तुमने प्यार की...सुषमा वर्मा
क्यों अब इंतजार....
तुम्हारी आँखों में नही दिखता,
क्यों अब वो मुझ पर एतबार,
तुम्हारी बातो में नही मिलता,
तम जो फैला
तन विक्रय हित
निकली लैला
“ मेरी मैया ! मैना मीठे सुर में जब मै ना , मै ना, मै ना कहती है तब मै नहीं , मै नहीं,
इस बात को कहकर अपने मन के छोटेपन और संकुचित दृष्टिकोण से अनायास ही मुक्त हो जाती है ।
इसलिए उसके बोल सभी को अच्छे लगते है ।
इधर बकरी बोलती है तो ‘मै-मै-मै ‘ की आवाज गूंजती रहती है।
इसलिए उसका बोलना अच्छा नहीं लगता । उसमे उसका अहं जो बोलता है ।
छत्तीसगढ़ का मॉरिशस बुका...ललित शर्मा
छत्तीसगढ़ में भले ही समुद्र नहीं है लेकिन ‘सी बीच’ की सैर करने और बोटिंग की तमन्ना रखने वालों को मायूस होने की जरूरत नहीं। शहरों की आपाधापी से दूर प्राकृतिक सौंदर्य से भरी यह ऐसी जगह है, जहाँ गर्मी में भी दिलोदिमाग को सुकून मिलता है। यहां मीलों तक 400-450 फीट की गहराई में पानी ही पानी है। हरे-भरे जंगल और पहाड़ों के बीच झीलनुमा इस जगह पर नीला जल दिल-ओ-दिमाग पर छा जाता है।
छत्तीसगढ़ में भले ही समुद्र नहीं है लेकिन ‘सी बीच’ की सैर करने और बोटिंग की तमन्ना रखने वालों को मायूस होने की जरूरत नहीं। शहरों की आपाधापी से दूर प्राकृतिक सौंदर्य से भरी यह ऐसी जगह है, जहाँ गर्मी में भी दिलोदिमाग को सुकून मिलता है। यहां मीलों तक 400-450 फीट की गहराई में पानी ही पानी है। हरे-भरे जंगल और पहाड़ों के बीच झीलनुमा इस जगह पर नीला जल दिल-ओ-दिमाग पर छा जाता है।
शीर्षक कहता है कुछ इस तरह..नये अंदाज में
ही बिना किसी के
कहीं कोई जिक्र
किये हुऐ और
बाकी एक अरब से
ऊपर के पास के
झोलों के पेंदें रहें
फटे और खुले
ताकि बहती रहे
हवा नीचे से ऊपर
और ऊपर से नीचे
आसान हो
निकालना
हवा को हाथ से
मुट्ठी बांध कर
और चिल्लाना
.....
आज्ञा दें आज..
यशोदा को
सादर..
.....
आज्ञा दें आज..
यशोदा को
सादर..





