सादर अभिवादन
आज 31 दिसंबर
आज कतल की रात है
आज कतल किया जाएगा 2023 का
और ज़श्न -ए-कतल का खर्च बगल वाले की जेब से निकाला जाएगा
पिछली बार उलूक की जेब
मिली थी...
अब देखिए आज की रचनाएं
आने वाला कल भी
खड़ा है देहरी के
उस पार..
आज के भरे घट मे
बदलने की ख़ातिर
नए साल में या कभी भी न-इंसाफी नहीं हो -
मजबूर को सहारा और मेहनत को बराबर न्याय मिले !
शायद तरसे हुए को थोडा प्यार !
एक शेर मदन मोहन दानिश साहब का फिर विदा -
ये कहाँ की रीत है जागे कोई सोए कोई
रात सब की है तो सब को नींद आनी चाहिए !!
सीख लेना अच्छा है
सिखा कर जा रहा है कम से कम
सपना हो लेने से बचने की पढ़ाकर
कोई अपनी किताब
तुम फिर से नई कसमें खाने लगे जबकि
पुराने वादों को टाला जा रहा है ।
तुम पसीने से लथपथ यूं कि मानो
चाँद को पानी में उबाला जा रहा है ।
कुसुम लदी
लता लज्जा में पगी
ज्यों नव व्याही।
***
धूप बटोरे
रात के छिटकाये
दूब पे मोती।
आज बस
आज अंतिम दिन है
अब अगले वर्ष दर्शन होंगे
सादर




