सादर अभिवादन
मेचोंग तूफान आया हुआ है
सभी तरफ जल-जल है
हवा में नमी है, ठण्ड भी बढ़ी हुई है
और आज भाई रवीन्द्र जी व्यस्त हैं
रचनाएं देखें
जीवन दे उपहार अनोखे
अपनी ही झोली क्यों ख़ाली,
सब दे कर भी कभी न चुकता
क्यों दिल की साँकल उढ़का ली !
क्योंकि इस दुर्दिंन समय में
कागज़ गिरवाये शब्दों से
अधिक जरूरी है,
दबती न्याय की पूकार पर
तुम्हारा पेपरवेट बनना
मैंने चाहतों की सारी उम्मीदे छोड़ दी
खुश रहने लगा हूँ जबसे उम्मीदे छोड़ दी
यूँ ज़िन्दगी को अक्सर जिया हूँ मैं
गरजती बारिशों में भी सूखा रहा हूँ मैं
आकाशवाणी क्लब, पटना में मेरे काव्य संग्रह ' किलकारी ' का लोकार्पण समारोह संपन्न हुआ.
साहित्य और समाज के प्रति जागरूक करती संस्था ' लेख्य मंजूषा ' के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह का संचालन संस्था की अध्यक्ष डा विभा रानी श्रीवास्तव ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रवीण ने किया। अध्यात्म, जीवन दर्शन, प्रकृति दर्शन, प्रेमिल भावोच्छवास, माटी की सुगंध, समसामयिक समाज और शीर्षक रचना में वर्गीकृत यह संग्रह देश के बच्चों को अपनी परंपरा, संस्कार और मूल्यों से जोड़ने का प्रयास है।
कोकिल कुहुक कूजती कानन
किसलय कोपल कुसुमित कुञ्जन
साँझ सुशोभित सज्जित सुंदर
स्वर संगीत सुमृदुल सुहावन
अंबुद अमिय अनंदित अतुलित
अभिसिंचित अभिनंदन
आज बस
कल मिलिएगा सखी श्वेता से
सादर




