शीर्षक पंक्ति: आदरणीया अनीता सुधीर 'आख्या' जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
'पाँच लिंकों का आनन्द' परिवार की ओर से होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ l
गुरुवारीय अंक
लेकर हाज़िर हूँ।
आइए पढ़ते
हैं आज की
पसंदीदा रचनाएँ-
होलिका मद आप डूबी
शक्ति भ्रष्टा मोह में थी
भूल कर सब दंभ में वो
मूढ़ता की खोह में थी
जल मरी अज्ञान तम में
हो अमर फिर ध्रुव गमकता।
मादक सी गंध है होली के रंग लिए
टूटे तारों से झंकृत हो आया फिर से मन
कोयल कूकी बुलबुल झूली
सरसों फूली मधुवन महका मेरा मन
छुयी मुई सी नशा नैन का
यादों वादों का झूला वो फूला मन
उड़े गुलाल अबीर अंगन
चौबारा रंग नहाए
बालवृंद पिचकारी ले
हैं गलियन धूम मचाए
साजन हैं परदेस
सजनियाँ ड्योढी बैठ निहारे ।।
पूर्णिमा की फागुनी को
है प्रतीक्षा बालियों की
जब फसल रूठी खड़ी है
आस कैसे थालियों की
होलिका बैठी उदासी
ढूँढती वो गीत अनुपम।।
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फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव