सादर अभिवादन
एक आदमी के लिए सच्चे प्यार की परिभाषा क्या है?
एक वेश्या ने एक साधु को देखा और वह तृप्ति से भर गई और उसने उसे
प्रसन्न करने के लिए अपना प्रस्ताव उसके सामने रखा।
साधु ने बस इतना कहा, "जिस दिन मुझे लगेगा कि तुम्हें मेरी जरूरत है, मैं आऊंगा
वेश्या ने सोचा, "उसे अभी जरूरत नहीं है।"
30 साल के बाद, वह बूढ़ी हो गई और गाँव के लोगों ने उसे गाँव से निकाल दिया।
सर्द रात थी, ठंड से कांप रही थी, प्यासी थी। उसकी सेवा करने वाला कोई नहीं था।
उसने पानी मांगा।
अचानक कोई पानी से भरे गिलास के साथ दिखाई दिया।
उसने गिलास लिया, पिया और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए अपना चेहरा घुमा लिया।
वह हैरान रह गई और रोने लगी। वही साधु थे।
भिक्षु ने उसके आँसू पोंछे और कहा, मैंने तुमसे कहा था कि जिस दिन
तुम्हें मेरी जरूरत होगी मैं आऊंगा
अब रचनाएँ...
तू भ्रमर है, गुनगुनाता हर सुमन पर ।
सुमन भी खुश होके मुस्काता नयन भर ।।
पंखुड़ी जब देखती तेरी उड़ाने,
फड़फड़ाकर लगती वो भी पर फुलाने,
शनै-शनै: खिल वो जाती फूल बनकर ।।
कांटों के जख्म हाथों पर, रुसवाईयों के दिल पर,
हमने भी करके देखा है ,ये इश्क गुलाबों वाला।
बफा ,कसमें, और वादे, बेरंग सब ही निकले,
जैसे पन्नों में छिपा हो सूखा,फूल किताबों वाला।
मन हर दिन कोई नया विचार,
कोई नया गीत रचे।
यह अनादि सत्य है कि सनातन मूल्यों को
पकड़ कर ही नया सृजन होता है,
वैसे ही जैसे मूल को
पकड़ कर ही नया फूल खिलता है.
लिए पोटली खट्टी मीठी यादों की
उनकी गलियों में जाएंगे इक न इक दिन
पत्थर, मोम, फूल या काँटे, सब उनके
ऐसे मन को बहलायेंगे इक न इक दिन
यही सोचकर सपने देख रहा था मैं
शायद वो इनमें आएंगे इक न इक दिन
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आज बस इतना ही
सादर