सादर अभिवादन
टाईम-टेबल फिर गड़बड़ा जाता
पर एन टाईम पर रवीन्द्र जी ने कहा
मैं दिल्ली से बाहर हूँ कोई और दिन आ जाऊँगा
सो वे रविवार को आएंगे
वर्षांत होने को है..किसी पाठक के मन मे
कुछ गुड़गुड़ा रहा हो तो कहिएगा
रचनाएँ....
सहसा रुख़ बदलना पहचाने न कोई,
मन की अगम गहराई जाने न
कोई। कौन डूबे कहां, किस
अंध घाटी के अंदर,
कहना नहीं
आसान,
इसी
पल में है समाहित सारा ब्रह्माण्ड - -
बला है, कहर है, आफत है यह जवानी,
चेहरे पर चार चाँद लगाती है जवानी,
दीवानगी के संग दिखाती है खास अदाएँ,
चलने में अपनी शान दिखाती है जवानी।
वशीकरण तो कुछ पल का होता है,,
या फिर कुछ दिन का।
तिलिस्म टूटते ही,
टूट जाता है सब मायाजाल।
दूर होता है मन का वहम,
और झूठे प्रेम की चाल।
परंतु प्रेम अनंत हैं,
मेरी ही आत्मा पर जमा रहा कालिख है...
न न .. अब और नहीं
और नहीं लादूँगा खुद पर 'कुछ होने' का बोझ
नहीं तो ..!
मेरा जादूगर बदल देगा मुझे उस सुनहरी छड़ी में
जिसकी छुअन से सच झूठ में बदल जाता है...
कड़क की ठंड है लेकिन,
गुलाबी धूप भी फैली।
आओ बैठें आंगन में,
चाहे गात हो मैली।
रजाई छोड़ हम आये,
लगती धूप अब प्यारी।
...
कुछ ओशो के बारे में
ओशो (मूल नाम रजनीश) (जन्मतः चंद्र मोहन जैन, ११ दिसम्बर १९३१ - १९ जनवरी १९९०), जिन्हें क्रमशः भगवान श्री रजनीश, ओशो रजनीश, या केवल रजनीश के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय विचारक, धर्मगुरु और रजनीश आंदोलन के प्रणेता-नेता थे। ... चन्द्र मोहन जैन का जन्म भारत के मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन शहर के कुच्वाडा गांव में हुआ था।
तुम विचार कर रहे हो, तो तुम क्या विचार कर सकते हो? तुम अज्ञात पर कैसे विचार कर सकते हो? तुम केवल ज्ञात पर विचार कर सकते हो। तुम इसे बार-बार चबा सकते हो, लेकिन यह ज्ञात है। यदि तुम जीसस के बारे में कुछ जानते हो, तो तुम इस पर बार-बार चिंतन कर सकते हो; अगर तुम कृष्णा के बारे में कुछ जानते हो, तो तुम इस पर बार-बार चिंतन कर सकते हो; तुम संशोधन, बदलाहट, सजावट किए जा सकते हो - लेकिन यह तुम्हें अज्ञात की ओर ले जाने वाला नहीं है। और "ईश्वर" अज्ञात है।
आज बस इतना ही
सादर





