सादर अभिवादन...
ख्वाब मत बना मुझे..
सच नहीं होते,
साया बना लो मुझे..
साथ नहीं छोडेंगे..!!
अब देखिए रचनाएँ ..

तुम बस तुम
जिसमें मैं नहीं बची
हमसफ़र हुए
एक घर हुए
तल्खियाँ फिर भी खिड़कियों से
चुपचाप परस गयीं
पहले हम एक थे
अब हम दो हुए
है अस्तित्व तुम्ही से मेरा
जब भी खोजा जानना चाहा
तारों भरी रात में खुद को
पहचानना चाहा |

थैंक्यू…कह कर लड़की ने आराम से सीट पर बैठ कर चैन की साँस ली। सुलक्षणा उस लड़की की जगह भाई के सामने रॉड पकड़ कर खड़ी हो गई। दीपक अचकचा कर एक कदम पीछे हट गया। सभी की निगाहें दीपक पर जमी थीं और दीपक की निगाह बस के फर्श पर।
उदासियों से भरी इस दुनिया में रहना यदि उदास करता है तुम्हें तो चलो खत्म करते हैं अपना जीवन लेकिन जीवन खत्म करने से पहले चलो मिल आते हैं किसी नेत्रहीन से या फिर किसी दोनो पैरों से अशक्त से नहीं तो जिसने गंवाए हैं अपने हाथ चलो उसी से मिल आते हैं एक पल। ऐसा कभी कोई मिला है
मत बाँधो इसको खूंटे से,
बेटी है ये गाय नहीं है |
मोमबत्तियां जला रहे हैं,
न्याय भरा समुदाय नहीं है |
निर्भयता से बेटी रह ले,
ऐसी एक सराय नहीं है |
....
बस फिर मिलेंगे
बस फिर मिलेंगे


