सादर अभिनन्दन
आज फिर मैं यशोदा....
सुबह-सुबह उठ जाती हूँ
पढ़ने बैठ जाती हूँ
जो मन में भाया
उस पन्नें में
एक चिप्पी लगा देती हूँ
वही चिप्पियों वाले पन्ने
आपके सामने रख रही हूँ....
बोतल में बंद हवा
हवा पर हवा का 'अधिकार' नहीं रहा। हवा अब इंसान के 'नियंत्रण' में आ गई है। इंसान ने हवा की 'आत्मा' को बोतल में कैद कर बेचना शुरू कर दिया है। जी हां, अब हवा भी बाजार में बिकने को तैयार है। जिस प्रकार सील्ड बोतल में पानी भरकर बेचा जाता है। ठीक उसी तरह अब हवा को भी बोतल में बंदकर बेचा जाएगा।
जब मैं तुम्हारी घुप्प चुप्पी से
परिशां होकर चुप हो जाता हूँ
तब मेरी चुप्पी चुपचाप आकर
मुझे यूँ चुपचाप रहने से रोक
ये समझा कर सिहर जाती है
ईश्वर के द्वारा रचे गए इस संसार में सबसे अद्भुत प्राणी सिर्फ मनुष्य ही है. मनुष्य को ही ईश्वर ने ज्ञान और बुध्दि से नवाज़ा है ,ताकि वो अन्य सभी प्राणियों में श्रेष्ठ रहे . मनुष्य जैसे जैसे बढता गया वैसे वैसे उसके जीवन में आमूल परिवर्तन आये है . और इन्ही परिवर्तनों ने उसके जीवन को और बेहतर बनाया और इस बेहतरी ने उसे अपने जीवन में अचार ,विचार, व्यवहार और संस्कारों से भरने का अवसर भी दिया . इन्ही सब बातो की वजह से उसने अपने जीवन में शिष्टाचार को भी स्थान दिया
जब कभी बारिश होती है
जब कभी रुपहले बादल नीचे उतरते हैं
जब कभी चाँदनी धरती पर उतरती है
उस उम्रदराज़ औरत के भीतर से
एक छुईमुई लड़की निकलती है
आज की अभी-अभी पढ़ी रचना....
खुदा वाली चिठ्ठी..!!
आज सुबह मैंने आँखें खोली तो मेरे सिहराने एक चिठ्ठी रखी हुई थी, मैंने अधखुली आँखों से उसे पढ़ा और पढ़ने के बाद बेशक पूरी नींद खुल गई हैं जो कुछ यूँ थी- प्यारी बिटिया तुम्हें भला कुछ भी लिखने की कहाँ जरुरत हैं तुम खुद बहुत समझदार हो पर बीते वक़्त में तुम जैसे जी रही हो, जो सोच रही हो वो सब देखा तो मुझे तुम्हें लिखना जरुरी लगा, तुम एक मंजिल पर ठहर क्यों रही हो?
आज्ञा दीजिए यशोदा को...
फिर मिलते हैं...
सादर


