सादर अभिवादन स्वीकार करें
बैठे थे
अपनी मस्ती में
कि
अचानक तड़प उठे,
अपनी मस्ती में
कि
अचानक तड़प उठे,
आ कर
तुम्हारी याद ने
अच्छा नहीं किया।
तुम्हारी याद ने
अच्छा नहीं किया।
कलम चल रही जरा धीरे धीरे
भाव बन रहे मगर धीरे धीरे।
उम्मीदों की जिद कायम है अब भी
शब्द बंध रहे हैं जरा धीरे धीरे।
मन पाए विश्राम जहाँ.....अनीता
अभी शुक्रगुजार है सांसें
भीगी हुईं सुकून की बौछार से
अभी ताजा हैं अहसास की कतरें
डुबाती हुई सीं असीम शांति में
अभी फुर्सत है जमाने भर की
बस लुटाना है जो बरस रहा है
मन पाए विश्राम जहाँ.....अनीता
अभी शुक्रगुजार है सांसें
भीगी हुईं सुकून की बौछार से
अभी ताजा हैं अहसास की कतरें
डुबाती हुई सीं असीम शांति में
अभी फुर्सत है जमाने भर की
बस लुटाना है जो बरस रहा है
लो
जा रही है कविता
उस गली में
रंग इतने सारे लगा कर
मुझसे आँख बचा कर
मेरी धड़कन की ध्वनि लिए
रच रही एक सन्नाटा
नारी हूँ तो क्या
कमज़ोर नहीं हूँ
माँ बहन बेटी पत्नी
सब हूँ पर सशक्त भी हूँ मैं
अम्बर प्यासा धरती प्यासी राहें मेघों की भटकी हैं
तरुवर प्यासे चिड़िया प्यासी कलियाँ सूखी सी लटकी हैं
खेतों की वीरानी में कोलाहल सूखे का गूँज रहा
अपनी करनी पर पछताती मानव की साँसें अटकी हैं
कविता मंच.....हितेश शर्मा
क़यामत से ही बस इक उम्मीद बाकी हो जिसे
फिर उसके लिए जहर से उम्दा जाम क्या होगा
उनके इंतज़ार ने अब तक इस दिल को ज़िंदा रखा
उनसे मिलने से अच्छा भला और पैगाम क्या होगा
और अंत में आज की शीर्षक कड़ी..
अन्तर्मथन.....डॉ. टी. एस. दराल
एक सेवानिवृत पति की दिनचर्या का हाल
डॉक्टर साहब , मेरे पति सारी रात नींद में बड़बड़ाते हैं , कोई अच्छी सी दवा दीजिये।
डॉक्टर : ये दवा लिख रहा हूँ , केमिस्ट से ले लेना। रोज एक गोली सुबह शाम लेनी है। आपके पति बड़बड़ाना बंद कर देंगे।
पत्नी : नहीं नहीं डॉक्टर साहब , आप तो कोई ऐसी दवा दीजिये कि ये साफ साफ बोलना शुरू दें। पता तो चले कि ये नींद में किसका नाम लेते हैं।
डॉक्टर : बहन जी , ये दवा आपके पति के लिए नहीं , आपके लिए है। आप उन्हें दिन में बोलने का मौका दें , वे नींद में बड़बड़ाना अपने आप बंद कर देंगे।
आज्ञा दें यशोदा को
कल यदि संजय भाई नहीं दिखे तो फिर मिलूँगी
कविता मंच.....हितेश शर्मा
क़यामत से ही बस इक उम्मीद बाकी हो जिसे
फिर उसके लिए जहर से उम्दा जाम क्या होगा
उनके इंतज़ार ने अब तक इस दिल को ज़िंदा रखा
उनसे मिलने से अच्छा भला और पैगाम क्या होगा
और अंत में आज की शीर्षक कड़ी..
अन्तर्मथन.....डॉ. टी. एस. दराल
एक सेवानिवृत पति की दिनचर्या का हाल
डॉक्टर साहब , मेरे पति सारी रात नींद में बड़बड़ाते हैं , कोई अच्छी सी दवा दीजिये।
डॉक्टर : ये दवा लिख रहा हूँ , केमिस्ट से ले लेना। रोज एक गोली सुबह शाम लेनी है। आपके पति बड़बड़ाना बंद कर देंगे।
पत्नी : नहीं नहीं डॉक्टर साहब , आप तो कोई ऐसी दवा दीजिये कि ये साफ साफ बोलना शुरू दें। पता तो चले कि ये नींद में किसका नाम लेते हैं।
डॉक्टर : बहन जी , ये दवा आपके पति के लिए नहीं , आपके लिए है। आप उन्हें दिन में बोलने का मौका दें , वे नींद में बड़बड़ाना अपने आप बंद कर देंगे।
आज्ञा दें यशोदा को
कल यदि संजय भाई नहीं दिखे तो फिर मिलूँगी






