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शनिवार, 14 मई 2016

302 अनुभव




सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष

आखिर धनी होने का एहसास मुझे भी हो ही गया
शुक्रिया
लोग चोरी का इल्ज़ाम लगाते हुए पोस्ट बनाते
तो
मैं भी सोचती ..... काश ..... मैं ऐसा कुछ  लिख पाती कि कोई चुराता .....







अनुभव/अभिव्यक्ति



सीन टू
1 हॉल, किचन लैट-बाथ। सोनल जयेश टोप्पो। विद्या नगर। बाहर क्रॉस। किराया 4000 रुपए। हम परिवार की तरह रहते हैं। हर सन्डे आराधना भी हमारे घर में ही होती है। हम लोग बस्तियों में बहुत सेवा करते हैं। फादर भी आते हैं। आप भी उसमें शामिल होंगे तो आपको भी अच्छा लगेगा।
सीन थ्री
मकान 5 BHK। मालिक उपाध्याय जी। विनोबा नगर। किराया सिर्फ 6 हज़ार। अभी नहीं दिखाएंगे, पहले नाम बताओ। जी बरुण। और आगे। श्रीवास्तव। ठीक है।



अपने


मेरे दादा जी ने मुझे एक चीज़ सिखाई थी : राजू, जब भी तुम कुछ खरीदने जाओ तो खुद से तीन सवाल करो ;
पहला: क्या मैं इस को खरीदने में खुद समर्थ हूँ ? कहीं मैं दुसरे के धन का इस्तमाल तो नहीं कर रहा हूँ।
           अगर इसका उत्तर हाँ में मिले तो खुद से दूसरा प्रश्न पूछो
दूसरा : क्या मुझे इसकी वास्तव में ज़रूरत है ? अगर इस का उत्तर भी हाँ में मिले तो आखिर में खुद से पूछो
तीसरा : क्या इसके बिना मेरा काम चल जायेगा ? और इस प्रश्न का उत्तर अगर "न" में मिले तो उस वस्तु  को      बिना  देर किये खरीद लो।


इशारा है काफी


अदा देख उनकी
गर हार जायें

सोचें उन्हें ही
और वो सपने में आये
समझ आप जायें



अपना रंजो गम अपनी परेशानी


तुम्हे उनकी कसम इस दिल की वीरानी मुझे दे दो ।
ये माना मैं किसी काबिल नहीं हूँ इन निगाहों मे
बुरा  क्या है अगर ये दुःख ये हैरानी  मुझे दे दो ।
मैं देखूं तो सही दुनिया तुम्हे  कैसे सताती है



घन गरजत नहीं



राम दुआरे सब औघारे
परबत के हे बासी भइया
चार बूंद तनि एहर पठावा
नगरी पूर बा प्‍यासी भइया



दोस्ती सवालों के घेरे में


मुग़ालतों में जीते रहे ज़िन्दगी
अपनों से कहाँ हम नाराज़ थे
कई राज़ जबाब ढूंढने में हारे हैं
कई जख्म हरे हैं



मैं रहूँ या ना रहूँ



फिर मिलेंगे ...... तब तक के लिए
आखरी सलाम


विभा रानी श्रीवास्तव






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