
कोरोना ने मेरी दीदी डॉ वर्षा सिंह को मुझसे छीन लिया....
आज 03.05.2021 को सुबह 02:00 बजे कोरोना ने मेरी दीदी डॉ वर्षा सिंह को मुझसे छीन लिया....
आज की सुबह एक मनहूस खबर लाई
आदरणीय डॉ. वर्षा सिंह नही रहीं
उनके बारें में अधिक तो पता नहीं
पर आज उनकी ग़ज़ले पढ़िए..
अंकुरित संभावना मुरझा रही है
शोक से संतप्त होकर गा रही है
आजकल मेरी ग़ज़ल रूठी हुई है
जो बनी मरहम सदा सुखदा रही है
इस जहां के हज़ार कांटों में
इक महकता गुलाब है औरत
इसमें दुर्गा, इसी में मीरा भी
आधी दुनिया की आब है औरत
जोड़, बाकी, बटा, गुणा "वर्षा"
ज़िन्दगी का हिसाब है औरत
आज न तो लिखने का मन है
नही पढ़ने का
बस सहम कर रहने का मन है
किसी को भय है कि
ईश्वर सब देख रहा है…!!
किसी को विश्वास है कि
ईश्वर सब देख रहा है…!!!
सादर