यूँ तो आज कर्मी दिवस है लेकिन समझ में नहीं आया कि क्या कहूँ....
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्
कभी भी कैसी भी परिस्थितियों में कमजोर नहीं पड़ने वाली को भी चाहिए ....
‘‘आप इस वृद्धा को मेरे साथ भेज दीजिए. मैं भी उधर का ही रहने वाला हूं. आज शाम 4 बजे टे्रन से जाऊंगा. इन्हें ट्रेन से उतार बस में बिठा दूंगा. यह आराम से अपने गांव पीपला पहुंच जाएंगी.’’ सिपाहियों ने गोमती को उस अनजान व्यक्ति के साथ कर दिया. उस का पता और फोन नंबर अपनी डायरी में लिख लिया.
'अज्ञान खत्म हुआ तो मोक्ष हथेली पर है'
आकाश में चक्कर लगाते हुए वह दिखाई पड़ी
परिधि इतनी बड़ी थी उसके चक्कर लगाने की
जैसे वह समूचे आकाश को किसी अदृश्य धागे से
बाँध रही हो…
यह एक बढ़िया छंद था
जो मेरी आँखों के आगे रचा जा रहा था
'कड़वा फल मीठा है और मीठा फल कड़वा है'
अर्जुन ने पाया सारथि रुपी कृष्ण का संग ,
और ...,
मीरा के श्रद्धा-समर्पण भरे गीतों का सारंग ...,
ये ही परमेश्वर ........,
ये ही परमानन्द।
प्रेम है....
मानवीय -संवेदनाओ की की सौंधी- सुगंध...।
'गठबंधन की पृष्ठभूमि को आकार देने वाला निराकार'