निवेदन।


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शनिवार, 1 मई 2021

3015... मोक्ष

यूँ तो आज कर्मी दिवस है लेकिन समझ में नहीं आया कि क्या कहूँ....

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्

कभी भी कैसी भी परिस्थितियों में कमजोर नहीं पड़ने वाली को भी चाहिए ....

मोक्ष

‘‘आप इस वृद्धा को मेरे साथ भेज दीजिए. मैं भी उधर का ही रहने वाला हूं. आज शाम 4 बजे टे्रन से जाऊंगा. इन्हें ट्रेन से उतार बस में बिठा दूंगा. यह आराम से अपने गांव पीपला पहुंच जाएंगी.’’ सिपाहियों ने गोमती को उस अनजान व्यक्ति के साथ कर दिया. उस का पता और फोन नंबर अपनी डायरी में लिख लिया.

'अज्ञान खत्म हुआ तो मोक्ष हथेली पर है'

मोक्ष

आकाश में चक्कर लगाते हुए वह दिखाई पड़ी

परिधि इतनी बड़ी थी उसके चक्कर लगाने की

जैसे वह समूचे आकाश को किसी अदृश्य धागे से

बाँध रही हो…

यह एक बढ़िया छंद था

जो मेरी आँखों के आगे रचा जा रहा था

'कड़वा फल मीठा है और मीठा फल कड़वा है'

मोक्ष

 अर्जुन ने पाया  सारथि रुपी कृष्ण  का संग ,

और ...,

मीरा के श्रद्धा-समर्पण भरे गीतों का सारंग ...,

ये ही परमेश्वर  ........,

ये ही परमानन्द।

प्रेम है....

मानवीय -संवेदनाओ की की सौंधी- सुगंध...।

'गठबंधन की पृष्ठभूमि को आकार देने वाला निराकार'

मोक्ष

क्यू लोग पाखंडओ  मे पड़ कर धोखे खाते हैं, 
 रब को पाने के लिए किसी मध्यम की जरुरत नहीं, जब यही संदेश सभी विद्वानों ने बांटा है।
सबसे बड़ा धर्म तो बस इंसानियत का कहलाता  है, जो इंसानो की कदर करे सचा इंसान वो ही कहलाता है। 
सभी धर्मों का सार यही हर धर्म हमे सिखाता है

 'धर्म और कर्म के पलड़े में तुलता तृष्णा लिए त्रिशंकु बना'


 मिट्टी के हर ज़र्रे में भरे हुए थे नाना प्रकार के उर्वरकों के रसायन। वह सुबह खांसता था तो काले बलग़म के लौंदे गिरते थे उसके मुंह से। अरसे से वह रक्तविकार का शिकार था। उनींदी रातों में धुंए और धुंध से करियाए आकाश में धुंआसी लालटेन की तरह टिमटिमाते ध्रुव या शुक्र तारे को निहारते हुए वह अपनी अनश्वरता पर खीझ कर कामना करता था अपने सृजे मनुष्य से जन्मने का ताकि मोक्ष पा सके वह किसी तरह अपनी जर्जर अमर काया से।

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शायद ही भेंट हो...
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