।। उषा स्वस्ति ।।
जीवन-तरु जिससे पाता है हरियाली अति प्यारी।
पा अनुपम पानिप तन बनता है बल-संचय-कारी।
पुलकित, कुसुमित, सुरभित, हो जाती है जन-उर-क्यारी।
भोर का उठना है उपकारी..!!
'हरिऔध'
बदलते मौसम,
बदलते दिन और बदलते जीवनशैली के साथ अनेक विचार,
हर दिन जगमग लौ के साथ राह दिखाता..तो इसी के साथ पढ़िये..✍️
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रूपसी
खन खनन कंगन खनकते, पांव पायल बोलती हैं।
झन झनन झांझर झनककर रस मधुर सा घोलती हैं।
सज चली श्रृंगार गोरी आज मंजुल रूप धर के।
ज्यों खिली सी धूप देखो शाख चढ़ कर डोलती है।
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जड़ों को देख पाना आसान नहीं होता, हम तो केवल महसूस कर लें....।
कल एक पौधे को गमले से निकाल कर फैंका गया होगा...
मेरी उस पर नजर ठहर गई...।
जड़ों से रिश्ता क्या होता
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सरल शब्दों में समझिए आम बजट: 2021-22
वर्तमान दशक का पहला बजट वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 1 फरवरी 2021 को पेश किया। इस बजट से काफी उम्मीदें लगाई ..
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ठहरे हुए पल..
हैं मेज़ के दो किनारे,
पड़ी सी है बेसुध
कोई मरू
नदी
दरमियां हमारे, तुम्हारे -
ओंठों पे आ कर
रुक जाती हैं
मृगतृष्णा,
पलकों
के आसपास बिखर जाते
हों जैसे सितारे, मैं..
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गजल
जिन्दगी तुम मुझे यूं ख़्वाब दिखाया न करो
तिश्नगी है बहुत उजालों की आस दिलाया न करो।।
करूं शिकवा भला कैसे शिकायत हो गई जिन्दगी
मलहम भी कांटो की नोक से लगाया न करो।..
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।। इति शम ।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह 'तृप्ति'...✍️




