गणतंत्र दिवस की पावन भोर मेंं
आप सभी का स्नेहिल अभिवादन
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राष्ट्र बलिदानों का कर्ज़दार है
करबद्ध नत हिय श्रद्धाहार है।
प्रथम नमन है वीर सपूतों को
जो मातृभूमि के खरे श्रृंगार हैं।
"गणतंत्र यानि एक ऐसा शासन जिसमें निरंकुशता का अंत करके आम जनमानस के सहमति और सहयोग से जनता के सर्वांगीण विकास के लिए शासन स्थापित किया गया।"
"गणतंत्र मतलब हमारा संविधान,
हमारी सरकार हमारे अधिकार और हमारे कर्तव्य"
हम देश के नागरिकों को मिला, क्या मिल रहा, क्या खोया क्या पाया,
यह विश्लेषण कभी नहीं समाप्त होना चाहिए,
नाउम्मीदी और असंतोष से उपजा संघर्ष
नाउम्मीदी और असंतोष से उपजा संघर्ष
ही नयी संभावनाओं की राह बनाते है
पर आज का पावन दिन
स्वतंत्र भारत के संविधान के द्वारा
हम नागरिकों को प्राप्त अपने
अधिकारों एवं कर्तव्यों की
खुशियों को महसूसने का है।
आइये आज की रचनाएँ पढ़ते
हैं-
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आइये आज की रचनाएँ पढ़ते हैं
सर्वप्रथम एक पवित्र वंदना
गणतंत्र महान

स्वर भर कर इतिहास सुनाता,
महापुरुषों से इसका नाता।
गौतम-गांधी, दयानंद की,
प्यारी धरती भारतमाता।
यहाँ हुए हैं पैदा नानक,
राम, कृष्ण-भगवान।
सारे जग से न्यारा,
अपना है गणतंत्र महान॥
गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं

न कि किसी राजा की निजी जागीर
यहाँ जनता ही निर्णायक है और स्वीकृत संविधान
के दायरे में चलाया जाता है शासन
यहाँ किसानों को भी हक है अपनी बात कहने का
युवाओं, महिलाओं को अपने स्वप्न पूर्ण करने का
जहाँ आजादी है हर नागरिक को
चुनने की अपना व्यवसाय
जहाँ हर मत समान रूप से कीमती है
काल से परे हो

विपुल विकल्प हो
अनंत उद्गार हो
अनुभूति की टंकार हो
सबकी कसौटी पर खरी हो
सापेक्ष सत्य पर अड़ी हो
गणतंत्र हमारा
संविधान के द्वारा जिसका सृजन हुआ
प्रजातंत्र की साख बचाता है गणतंत्र हमारा।
धर्म, जाति से ऊपर उठ कर चिंतन का
इक सुंदर संसार बनाता है गणतंत्र हमारा।
प्रजातंत्र की साख बचाता है गणतंत्र हमारा।
धर्म, जाति से ऊपर उठ कर चिंतन का
इक सुंदर संसार बनाता है गणतंत्र हमारा।
दलील क्या है?
हो गयी है राह पथरीली मगर ..
राह की भी राह ,ले कर देख लो
है वही पेड़ था झूला जिधर ...
आप अब पनाह ले कर देख लो !
और चलते-चलते पढ़िए
गणतंत्र दिवस

ओस भरी सर्दियों में जोश और ओज बढ़ा कर रक्त
संचार तीव्र कर देते थे । एक ही ग्राउण्ड पर पहले एक छात्रा
और फिर एक माँ के रूप में जिसका बच्चा भी उसी जगह
छात्र के रूप में सहभागी बने तो मेरे जैसी मांओं के गर्व
का भाव द्विगुणित हो जाना तो बनता ही था। बैण्ड की
मधुर स्वर लहरियों पर ध्वजारोहण पर बजता राष्ट्रगान,
परेड करते एन.सी.सी.कैडेट्स ..,स्कूली बच्चे..और विभिन्न
रंगारंग कार्यक्रम जिनकी प्रतीक्षा सबको साल भर रहती ..
उत्सव के समापन के साथ मंत्रमुग्ध करती छवियां आँखों
में भरे भीड़ मानो अगले वर्ष की सर्दियों तक मानो उन्हीं
पलों के लिए प्रतीक्षारत रहती ।

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वंदेमातरम
कल का अंक लेकर आ रही
प्रिय पम्मी दी।
#श्वेता सिन्हा

