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शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

1995...नववर्ष २०२१ का स्वागत है।

कैलेंडर की बदलती तारीख़ों में
नववर्ष की प्रथम भोर
आप सभी के जीवन में
मनवांछित खुशियाँ लेकर आये।
सभी पाठकों के लिए
हमारे पाँच लिंक परिवार की
मंगलकामनाएं -

दायित्व में पस्त अधिकारों की होती बेक़रारी।
हाय तौबा मचा लेते हैं खड़ा होकर किनारी।
विगत क्या आगत क्या रंगों की उलझन बड़ी,
जान-ए ली चिलम जिनका पर चढ़े अंगारी।
जिन्दगी से हम जब भी ...
सा, रे, ग, म सीखने के लिए प्रयत्नशील होते हैं
वो हमें उलझते देखने में जुटी रहती है
"सारे गम" को लेकर ... 
बस रगड़ा है पलड़ा सन्तुलित रहे..
-विभारानी श्रीवास्तव

दोस्त को दोस्ती से पहले,
प्यार को मोहब्बत से पहले,
खुशी को गम से पहले,
और आप को सबसे पहले,
हरदिल अज़ीज़ शुभकामनाएँ
-दिग्विजय अग्रवाल

2020  न बने 2021
ज़िन्दगी गुज़र गई
वक्त की सवारी में
तेरे मिलने के सुकून 
तेरे बिछुड़ने की बेक़रारी में
-यशोदा

वक़्त गुज़र जाता है यों ही गुज़रते-गुज़रते
एहसास ज़िंदा रहते हैं
सोते-जागते हँसते-रोते
दीवार पर एक परिवर्तन
ज़रुर देखना होगा
उम्र गुज़री है तमाम
कलेंडर बदलते-बदलते!
स्वागत नव वर्ष 2021
हँसते-हँसते!!
©रवीन्द्र सिंह यादव


क्षणिक विराग में बिता साल
क्षणिक अनुराग में आयेगा
कल
बेलौस समीरण फिर बह चला
नव अंकुरित,नव तरंग,नव पल
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..

बदलता है सब कुछ यहां,
नहीं रहता वक्त एक सा,
कष्टों  का साल  बीत गया,
आया है वर्ष  हर्ष का।
तुम्हारे आने से ये  उमीद जगी है,
नव-वर्ष तुम्हारा स्वागत है.....
©कुलदीप

सुनहरे सपनों की झंकार लाया है नववर्ष,
खुशियों के अनमोल उपहार लाया है नववर्ष,
आपकी राहों में फूलों को बिखराकर लाया है नववर्ष,
महकी हुई बहारों की खुशबू लाया है नववर्ष! 
-दिव्या



हार्दिक शुभकामनाओं सहित  साल के बदलाव की इस समययात्रा के साथ ग़ज़लयात्रा में आज प्रस्तुत हैं कुछ नई - पुरानी, ऐसी चुनिंदा ग़ज़लें जिनमें नए साल के आगमन के प्रति अनेक आशाएं दृष्टिगोचर होती हैं।



जीने की प्रत्याशा। वाहवाही का
झुनझुना दिखा कर लोग
लूट ले जाते हैं, हमसे
हमारा ही वजूद,
हम ख़ुद को
देखते हैं
यूँ ही
लुटते हुए, होश में रहने के बावजूद,
जिन्हें हम समझते हैं अपना
ख़ैरख़ाह, वही एक दिन
मौक़ा मिलते ही दे
जाते हैं, बड़ी ही
ख़ूबसूरती से
हम को



कोरोना काल में यदि नया साल मनाना हो जरूरी

तो तय कर लो एक निश्चित दूरी

कहीं अगर बीच में कोरोनो आ धमकेगा

तो सारी मौज-मस्ती पर पानी फेर देगा 

इसलिए 

क्षण भर की खुशी के चक्कर में 

खतरे न लो मोल


नव वर्ष नव उत्कर्ष...कुुुसुम कोठारी

सभी अपनों को निमंत्रण 
अगले पन्ने पर दूँगी
आके सभी लिख देना
साथ बिताई अपनी अच्छी यादें
सुखद क्षण  कुछ अच्छे विचार
फिर उस किताब की कुछ प्रतिलिपि






वीर भरें हुंकार हमारे , नए साल में ,
डर कर भागें वैरी सारे , नए साल में !

असत सत्य के आगे हारे , नए साल में ,
चहुँ दिशि फैले हों उजियारे ,नए साल में !
   


मनुष्य की जिजीविषा ही उसकी शक्ति है, इसलिए खराब हालात के बाद भी, टूटे मन के बाद भी लगता है कि सब कुछ ठीक होगा और एक सुंदर दुनिया बनेगी । 2021 का साल इस मायने में बहुत सारी उम्मीदों का साल है, टूटे सपनों को पूरा करने के लिए फिर से जुटने का साल है। 2020 की बहुत सारी छवियां हैं, करोना से टूटते लोग हैं, महानगरों से गांवों को लौटते लोग हैं, बीमारी से मौत की ओर बढ़ते लोग हैं, नौकरियां खोते और गहरी असुरक्षा में जीते हुए लोग हैं। मनुष्य इन्हीं आपदाओं से जूझकर आगे बढ़ता है और पाता है पूरा आकाश। 


बदलाव हो जायेगा यदि हम 2020 की दी हुई एक-एक सीख को स्मरण कर अपनी गलतियों को सुधारने लगेंगे। आधुनिकता की अंधी दौड़ से खुद को निकलकर अपनी परम्परागत जीवन शैली को अपनाते हुए खुद के सेहत का धयान रखना शुरू करेगें,घर को सुख-ऐश्वर्य के सामान से ही नहीं परिवार से सजाना शुरू करेगें,समाज को कुंठित-कलुषित करना छोड़ उसमे प्यार और भाईचारा का रंग भरना शुरू करेगें,प्रकृति को दूषित करना छोड़, उसे प्रदूषणरहित करने की ओर अग्रसर होंगे, अपनी सोच को बदलगे तो  बदलाव जरूर आएगा। ये निश्चित है। 
......

पुनः और पुनः शुभकामनाएँ
कल आ रही है विभा दीदी
एक और अनोखी प्रस्तुति के साथ।
----////----
ठूँठ पर बने नीड़,
माटी में दबे बीज के फूटने की आस
की तरह,
जटिल परिस्थितियों में
नयी संभावनाओं की प्रतीक्षा में
जीवन की सुगबुगाहट से ही
सृष्टि का अस्तित्व है।

-श्वेता





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