शिक्षक को उसकी
छड़ी लौटा दीजिये
शिक्षक देश में
अनुशासन लौटा देगा
सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
प्रतिपल ऋणी व नतमस्तक होकर
मिले ज्ञान को याद रखते हुए
प्रतिकूल समय में साहस, संयम से
स्थिर रहना ही है सार्थक
प्रतिपल ऋणी व नतमस्तक होकर
मिले ज्ञान को याद रखते हुए
प्रतिकूल समय में साहस, संयम से
स्थिर रहना ही है सार्थक
मैं खाली श्यामपट सा,तस्वीर सी मियाद बढ़ा दी ,
गुरु कहूं या गुड, थी जिंदगी कडवी मिठास बढ़ा दी ,
वरना कहां इतनी चाहत थी दिल में ,चमकने की,
वह आप थे गुरु, जो चिंगारी से पूरी आग जला दी!
कुछ छात्र तो उत्तर लिख रहे थे
लेकिन अधिकतर परेशान दिख रहे थे
तभी एक छात्र बोला
सर इतनी सख्ती, क्या ये सही है
ऐसे माहौल में बहुत परेशानी हो रही है

देखा जीवन की तीव्र तमाशा को ,
पानी तक मिली ना प्यासा को ,
दर – दर भटकता ही रहता
खाली लिए बैठे कासा को ,

हम बच्चें करें पढ़ाई,
चौबीस घंटे तन-मन-धन से।
जब बच्चे मिल करें शरारत,
समझाती हो बड़े जतन से।

देश के लिए मर मिटने की
बलिदानी राह दिखाता शिक्षक,
प्रकाशपुंज का आधार बनकर
कर्तव्य अपना निभाता शिक्षक,
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पुन: मिलेंगे
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