निवेदन।


फ़ॉलोअर

1479 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
1479 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 4 अगस्त 2019

1479....मै ही, हाँ सिर्फ मै ही हूँ-जिम्मेदार


जय मां हाटेशवरी......
काफी दिनों बाद बारिश थमी है.......
इस लिये आनंद कुछ अलग सा है......
बस भोले शंकर से एक अरज है......
अमरनाथ यात्रा पर गये अपने भगतों को......
दुष्ट राक्षसों से रक्षा करना.......
क्योंकि इन दुष्टों का कुछ पता नहीं.....
कब क्या कर दे.......

मै ही, हाँ सिर्फ मै ही हूँ-जिम्मेदार
कहाँ है दोषी
वो सारे सम्बन्धी
जो मिल गये मुझे जन्म के साथ
गढने को नित नये सम्बन्ध
सोचना चाहिये था मुझे
आने से पहले इस दुनिया में
तो लेनी ही चाहिये मुझे जिम्मेदारी
क्योकि
दोषी है- माँ
जिसने जन्म दिया
दोषी है- सपने
जिसने पहचान खोजी


मन
तुम्हारे स्वर के
आरोह-अवरोह पर
लिखे प्रेम-पत्र
तुम्हारी रुनझुनी बातें
हवा की कमर में खोंसी
पवनघंटियों-सी
गुदगुदाती है
शुष्क मन के
महीन रोमछिद्रों को।

दोहे
चमके चपला दामिनी ,मन में हुआ उजास
मोती बन बादल झरे  ,क्यों करे अविश्वास
जीवन डगर लगे कठिन ,न कर कभी उपहास
सम्हल कर तू कदम रख , समय करे परिहास

काया
सदाचार-शुचि-योग से, करे पुष्ट त्यों देह ।
करे पुष्ट त्यों देह, मरम्मत टूट फूट की ।
सेहत के प्रतिकूल, कभी ना जिभ्या भटकी ।
खट्टे फल सब्जियां, विटामिन सी नित चखता ।
यही विटामिन सुपर, निरोगी हरदम रखता ॥



मैं गाय जैसा'' पुरस्कार
''अरे, बहुत बार। हमारे देश में गुणी, ज्ञानी, प्रतिभाशाली लोगों की कोई कमी नहीं है।
हमें दुनिया भर के तरह-तरह के सम्मान मिलते रहे हैं। अभी तो हमारे एक ही माननीय को दसियों देश अपना सबसे बड़ा पुरूस्कार दे चुके हैं।''
''दसियों ? कऊन-कऊन सा ?"
''अरे, तुम अपना नाम तो बोल नहीं पाते ! वह सब कहां समझोगे !''
''नहीं भैया; बताइये ना ! भले ही बोल ना पाएं पर छाती तो फुल्लइये सकते हैं ! ई तो हमरे देशो के लिए गर्व का बात जो है।''
मजबूरन उसे बताना पड़ा कि बहुत कम समय में हमारे देश के एक ही आदमी को दुनिया के अलग-अलग देशों ने अपने-अपने सर्वोच्च पुरुस्कारों, जैसे, *जायेद मैडल पुरुस्कार, *फिलिप
कोटलर पुरूस्कार, *सियोल शांति पुरूस्कार, *चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरुस्कार, *सेंट एंड्रूयज़ पुरूस्कार, *फिलिस्तीन ग्रैंड कॉलर पुरूस्कार, *आमिर अमानुल्लाह खान
पुरूस्कार, *किंग अब्दुल सैश पुरूस्कार इत्यादि इत्यादि, से नवाजा है ! कई पुरूस्कार तो पहली बार किसी भारतीय को मिले हैं।  यह भी एक रेकॉर्ड ही है !''

घर में प्रकृति
अब अपने घर में बैठे-बैठे
मैं सब कुछ देख लेता हूँ,
अब मुझे घर से निकलने की
ज़रूरत ही नहीं पड़ती.

अस्पताल से
सफेद बिस्तर पर लेटी देह
देखती है
मिलने जुलने वालों के चेहरों को
अपनी पनीली आंखों से
कि,कौन कितना अपना है

अपनों में
अपनों का अहसास
अस्पताल में ही होता है -------

धन्यवाद।
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...