ऊट-पटांग दिवस पर
आप सभी को
सादर अभिवादन...
आज हम हैं....
प्रस्तुति भी हम ही देंगे...
चलिए चलें आज की ताबड़-तोड़ प्रस्तुति देखें....
अभी जगजीत की गजलें सुनेंगे ...
अंधेरों को मिलेंगे आज ठेंगे
ये दीपक रात भर यूँ ही जलेंगे
जो तोड़े पेड़ से अमरुद मिल कर
दरख्तों से कई लम्हे गिरेंगे
किसी के होंठ को तितली ने चूमा
किसी के गाल अब यूँ ही खिलेंगे
घन .....

पवन की पालकी
सवार होके घन,
निकले शान से।
काले कजरारे
नीर भार भरे घन,
नेह करे, दामिनी से।
मुहब्बत का श्री गणेश ....

हुस्न का बेहतर नज़ारा चाहिए ।
कुछ तो जीने का सहारा चाहिए ।।
हो मुहब्बत का यहां पर श्री गणेश ।
आप का बस इक इशारा चाहिए ।।
हैं टिके रिश्ते सभी दौलत पे जब ।
आपको भी क्या गुजारा चाहिए ।।
शौक .....
कुछ पूरे होते गए कुछ बिखरते गए
कुछ को तो मैने चुपके से जी लिया।
गीली मिट्टी की सौंधी सी खुशबू लेने का शौक बहुत था
बचपन मे आज वो शौक अपने घर मे लगे
चार गमले मे पानी डालते वक्त पूरा कर लेती हूं,
रिक्शे वाला ....
मैं न प्रेमी हूं
न आशिक हूं
न मंजनू हूं
न दीवाना हूं
मेरा काम है
सुबह से सड़कोँ पर
मनुष्य की मनुष्यता को ढ़ोना
रोज कमाना
रोज खाना
इच्छाएँ ....

इच्छाएँ घुमावदार जंगल जैसी हैं,
पहले थोड़ी सी दिखती हैं,
जब वहां पहुँच जाओ,
तो थोड़ी और दिखने लगती हैं,
चलते -चलते
एक जूनी खबर..
मान भी लेते हैं
लिख लेगा दो चार
बेकार की बातों
के कुछ पुलिंदे
पढ़ने को कौन
आयेगा क्यों आयेगा
और आखिर कब
तक आ पायेगा
लिखना पढ़ना तो
बौद्धिक भूख
मिटाने के लिये
किया जाता है
-*-*-
अब बारी है विषय की
बड़ा ही क्लिष्ट काम है ये
सतहत्तरवाँ विषय
है
बारिश
उदाहरण कुछ भी नहीं
अपने मन से लिखिए
और एक खास बात
आप चाहे तो अपनी पसंद के
फिल्मी या गैर फिल्मी बारिश के गीत का
का ऑडियो या वीडियो भी
भेज सकते हैं।
अंतिम तिथि- 29 जून 2019
प्रलाशन तिथि- 01 जुलाई 2019
मजा है आज लिखिए
छपेगी अगले महिने
पर भेजिएगा ब्लाग सम्पर्क फार्म पर ही
......
आदेश दें
दिग्विजय
आज हम हैं....
प्रस्तुति भी हम ही देंगे...
चलिए चलें आज की ताबड़-तोड़ प्रस्तुति देखें....
अभी जगजीत की गजलें सुनेंगे ...
अंधेरों को मिलेंगे आज ठेंगे
ये दीपक रात भर यूँ ही जलेंगे
जो तोड़े पेड़ से अमरुद मिल कर
दरख्तों से कई लम्हे गिरेंगे
किसी के होंठ को तितली ने चूमा
किसी के गाल अब यूँ ही खिलेंगे
घन .....

पवन की पालकी
सवार होके घन,
निकले शान से।
काले कजरारे
नीर भार भरे घन,
नेह करे, दामिनी से।
मुहब्बत का श्री गणेश ....

हुस्न का बेहतर नज़ारा चाहिए ।
कुछ तो जीने का सहारा चाहिए ।।
हो मुहब्बत का यहां पर श्री गणेश ।
आप का बस इक इशारा चाहिए ।।
हैं टिके रिश्ते सभी दौलत पे जब ।
आपको भी क्या गुजारा चाहिए ।।
शौक .....
कुछ पूरे होते गए कुछ बिखरते गए
कुछ को तो मैने चुपके से जी लिया।
गीली मिट्टी की सौंधी सी खुशबू लेने का शौक बहुत था
बचपन मे आज वो शौक अपने घर मे लगे
चार गमले मे पानी डालते वक्त पूरा कर लेती हूं,
रिक्शे वाला ....
मैं न प्रेमी हूं
न आशिक हूं
न मंजनू हूं
न दीवाना हूं
मेरा काम है
सुबह से सड़कोँ पर
मनुष्य की मनुष्यता को ढ़ोना
रोज कमाना
रोज खाना
इच्छाएँ ....

इच्छाएँ घुमावदार जंगल जैसी हैं,
पहले थोड़ी सी दिखती हैं,
जब वहां पहुँच जाओ,
तो थोड़ी और दिखने लगती हैं,
चलते -चलते
एक जूनी खबर..
मान भी लेते हैं
लिख लेगा दो चार
बेकार की बातों
के कुछ पुलिंदे
पढ़ने को कौन
आयेगा क्यों आयेगा
और आखिर कब
तक आ पायेगा
लिखना पढ़ना तो
बौद्धिक भूख
मिटाने के लिये
किया जाता है
अब बारी है विषय की
बड़ा ही क्लिष्ट काम है ये
सतहत्तरवाँ विषय
है
बारिश
उदाहरण कुछ भी नहीं
अपने मन से लिखिए
और एक खास बात
आप चाहे तो अपनी पसंद के
फिल्मी या गैर फिल्मी बारिश के गीत का
का ऑडियो या वीडियो भी
भेज सकते हैं।
अंतिम तिथि- 29 जून 2019
प्रलाशन तिथि- 01 जुलाई 2019
मजा है आज लिखिए
छपेगी अगले महिने
पर भेजिएगा ब्लाग सम्पर्क फार्म पर ही
......
आदेश दें
दिग्विजय



