सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष

इंतजार
इतना ऐतबार तो अपनी धड़कनों पर भी हमने न किया ;
जितना आपकी बातों पर करते हैं ;
इतना इंतज़ार तो अपनी साँसों का भी न किया ;
जितना आपके मिलने का करते हैं

वीर की लिखी हुई नज़्म
कब आओगे तुम आवाज़ लेकर,
इंतज़ार में,
ख़ामोशी शोर करती है|

कई बरसाते आई और चली गयीं पर कोई बारिस की बूँद मुझे भिगो न पायी
ठण्ड की सिहरन तो बहुत लगी पर उस सिहरन में तेरी गर्मी का एहसास न था
हवा का झोंका जब भी मुझसे टकराया तेरी यादो की खुश्बू को लाया
सावन,सर्द हवाएं,सुबह की किरन,ओस की बूँद,चाँदनी सब से तेरी बातें किया करता हूँ
खुशनुमा है जिंदगी वो आया है ।
नूर चेहरे पे लबों पर तबस्सुम छाया है
भरी महफ़िल में दिल ये तनहा-तनहा था
मेरे दिल का वो चैनों सुकूँ लाया है

बड़ा दर्द मिला इस मोहब्बत से ,
तन्हाईयाँ भी मिलीं ,जुदाइयाँ भी मिलीं,
बेदरद ज़माने से रुस्वाइयाँ भी मिली |
तेरे आने की आस पे ज़िंदगी को बचा रखा है,
नहीं तो कुछ न बच सका इस ज़माने से
अब बारी है विषय की
छिहत्तरवाँ विषय
पालकी
उदाहरण
ज़बान पर सभी की बात है फ़क़त सवार की
कभी तो बात भी हो पालकी लिए कहार की
गुलों को तित्तलियों को किस तरह करेगा याद वो
कि जिसको फ़िक्र रात दिन लगी हो रोजगार की
बिगड़ के जिसने पा लिया तमाम लुत्फ़े-ज़िन्दगी
नहीं सुनेगा फिर वो बात कोई भी सुधार की
रचनाकार हैं
आदरणीय नीरज जी गोस्वामी
अंतिम तिथि -22 जून 2019
प्रकाशन तिथि -24 जून
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