कल शाम किसी कारणवश बाजा़र गयी रास्ते में
जगह -जगह प्रेम -दिवस के नाम पर
जगह -जगह प्रेम -दिवस के नाम पर
हो रहे प्रेम-प्रदर्शन को देखकर सोचने लगी
प्रेम दिखावा है कि अनुभूति
प्रेम दिखावा है कि अनुभूति
अनायास ही
कुछ पंक्तियाँ याद आ गयी
प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट विकाय।
राजा परजा जो रुचे, शीश देय ले जाय।।
कबीरदास जी कहते हैं कि किसी खेत में प्रेम की फसल नहीं होती न किसी बाजार में यह मिलता है। जिसे प्रेम पाना है उसे अपने अंदर त्याग की भावना रखनी चाहिए और इसमें प्राणोत्सर्ग करने को भी तैयार रहना चाहिए।
आधुनिक संदर्भ में खासकर युवावर्ग के लिए यह कथन कितना सार्थक है विचारणीय है न..।
★★★★★
चलिए आज की रचनाएँ पढ़ते है-
आदरणीया मीना जी की सुंदर कविता
तब कविता ज़िंदा होती है,
प्यार जिन्हें जीवन से होता
उन्हें देख मृत्यु रोती है !
हम अपनी भावुकता में खुश,
तुम्हें लोक-व्यवहार मिले !
प्रेम दिवस पर मेरे प्रियतम
तुमको सबका प्यार मिले !!!
★★★★★
आदरणीय पुरुषोत्तम कुमार जी
चलो कुछ ख्वाब, शब्दों को हम दें!
संजीदगी, चलो इनमें भरें,
खुद-ब-खुद, ये झूमकर गाएंगे,
ये अ-चेतना से, खुद जाग जाएंगे,
रंग कई, जिन्दगी के देकर,
संजीदा हमें बनाएंगे।
★★★★★
आदरणीया जयश्री वर्मा
तुम क्या जानों,कैसी विरह-वेदना ,
हर आहट पे द्वार,चौखट तकना,
हर सरसराहट,धड़कन बढ़ जाना ,
तुम यूँ जान बूझ न बनो बेगाना।
★★★★★★
आदरणीया दीपा जी
अश्रु मसि से
पलकों ने
कपोलों पर
लिखे अनगिनत
पैगाम
मिटा जाओ
जाते-जाते
अपनी हर पहचान
★★★★★
आदरणीया कामिनी जी
"वेलेंटाइन्स डे "एक ऐसा शब्द ,एक ऐसा दिवस जो
पश्चिमी सभ्यता से आया पूरे विश्व के दिलो पर राज
करने लगा। कुछ लोग कहते है कि हर दिन प्यार का
होता है तो फिर कोई खास दिन ही क्यों ?बात तो सही है लेकिन याद कीजिये आपने अपने किसी भी प्यार के
रिश्ते में आखिरी बार कब आपने प्यार का इजहार
किया था। शायद याद भी नहीं हो।वैसे भी आज कल
हर रिश्ते में प्यार का बेहद आकाल पड़ा है वैसे मे
कोई एक खास दिन तो होना ही चाहिए
आज का यह अंक आपको
कैसा लगा?
बहुमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहती है।
हमक़दम के विषय के लिए
कल का अंक पढ़ना न भूलें
कल आ रही हैं
विभा दी विशेष प्रस्तुति के साथ।




