सादर अभिवादन।
आ
रहा
बसंत
फूल-पत्ते
पाये निखार
बसंत बहार
रंगारंग त्योहार।
आइये अब आपको आज की
पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-
पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-

नजर नजर का फेर है
कोई कह नहीं सकता
किसका है कैसा नजरिया
कोई सोच नहीं पाता
है क्या पैमाना नजर की खोज का |

सतर्कता गयी, दुर्घटना हुई.
अनुशासन ही देश को महान बनाता है.
हम सुनहरे कल की ओर बढ़ रहे हैं.
अच्छे दिन बस अब चौखट पर ही हैं.

चाय की तलब और आलस में लगी है होड़
शोर है बच्चों और पंछियों का
शरारतें हैं

घर के सभी लोगों के लिए कपड़े, पर्फ्यूम, कंघी, तेल, साबुन, साड़ी, सूट के कपड़े आदि सबकुछ तो चढ़ाया था लड़की वालों ने बरिक्षा में। मंदिर की दराज में रखा पंद्रह लाख का वह चेक भी दीदी ले आईं जो लड़की वालों ने नारंग जीजू के नाम पर काटा था।
क्रोध की वजह से व्यक्ति घर-परिवार और समाज से अलग हो सकता है। इसीलिए जब भी क्रोध आए, किसी भी तरह हमें मौन हो जाना चाहिए। मन को शांत करना चाहिए। मन की शांति के लिए सबसे अच्छा उपाय मेडिटेशन है। लंबे समय तक मेडिटेशन करने से क्रोध को काबू किया जा सकता है।
हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए
आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे अगले गुरूवार।
रवीन्द्र सिंह यादव
