आज विश्व-विकलांंग दिवस है। कुछ अटपटा सा लगता है, इतनी जल्दी हम जो कल तक विकलांंग थे, आज दिव्यांग बन गये। क्या नाम बदलने से सब कुछ बदल जाता है? विकलांगता कोई दैवीय उपहार नहीं है यह एक बाधा ही है, जो हमारे जीवन में अनेकों समस्याओं को जन्म देती है। दिव्यांग जैसे शब्दों के इस्तेमाल
से मुझे आपत्ति है क्यूंकि ऐसे शब्द गढ़ लेने भर से ही विकलांगों के साथ भेदभाव खत्म नहीं किया जा सकेगा।
मैं सोचता हूं इस सम्मानजनक संबोधन से हमारी समस्याओं में कोई कमी नहीं आयी है. आज भी कई परिवार ऐसे हैं, जो अपने विकलांग बच्चों को समाज के समक्ष परिचय देने से भी गुरेज करते हैं। उन्हेंं हमेशा बंद कमरों में ही रखते हैं। कई परिवारों में विकलांग के साथ कई प्रकार से दुर्व्यवहार किया जाता है। कोई भी अक्षम सक्षम बन सकता है, सबसे पहले परिवार-जनों की सोच उसके प्रति सकरातमक हो, जिसका परिवार में मान होगा, समाज भी उसे सम्मान की दृष्टि से देखेगा। इस प्रकार वो सभी के सहियोग से अवश्य ही अपनी बाधाओं को दूर करते हुए अवश्य ही एक दिन सफल व्यक्ति बन सकेगा। ये मेरा निजी अनुभव है, जिन विकलांगों को परिवार से सहियोग मिला, वो तो आज कामयाब है, और जिन्हे उनके परिवारों में तिरसकार की दृष्टि से देखा जाता था, वो अधिकांश असफल ही रहे। मैं आज विश्व-विकलांग दिवस पर उन परिवारों से, जिन में विकलांग बच्चे हैं, वे उनके प्रति सकरात्मक सोच रखते हुए, अपने बच्चों को हौसला दे। उनकी शिक्षा की व्यवस्था करे। उन्हेंं प्रोत्साहित करेंं। उन्हेंं बाधा रहित वातावरण प्रदान करें। आप के प्रयासों से एक दिन वो सफल व्यक्ति बनेंगे।
-कुलदीप सिंह ठाकुर
★★★★★
से मुझे आपत्ति है क्यूंकि ऐसे शब्द गढ़ लेने भर से ही विकलांगों के साथ भेदभाव खत्म नहीं किया जा सकेगा।
मैं सोचता हूं इस सम्मानजनक संबोधन से हमारी समस्याओं में कोई कमी नहीं आयी है. आज भी कई परिवार ऐसे हैं, जो अपने विकलांग बच्चों को समाज के समक्ष परिचय देने से भी गुरेज करते हैं। उन्हेंं हमेशा बंद कमरों में ही रखते हैं। कई परिवारों में विकलांग के साथ कई प्रकार से दुर्व्यवहार किया जाता है। कोई भी अक्षम सक्षम बन सकता है, सबसे पहले परिवार-जनों की सोच उसके प्रति सकरातमक हो, जिसका परिवार में मान होगा, समाज भी उसे सम्मान की दृष्टि से देखेगा। इस प्रकार वो सभी के सहियोग से अवश्य ही अपनी बाधाओं को दूर करते हुए अवश्य ही एक दिन सफल व्यक्ति बन सकेगा। ये मेरा निजी अनुभव है, जिन विकलांगों को परिवार से सहियोग मिला, वो तो आज कामयाब है, और जिन्हे उनके परिवारों में तिरसकार की दृष्टि से देखा जाता था, वो अधिकांश असफल ही रहे। मैं आज विश्व-विकलांग दिवस पर उन परिवारों से, जिन में विकलांग बच्चे हैं, वे उनके प्रति सकरात्मक सोच रखते हुए, अपने बच्चों को हौसला दे। उनकी शिक्षा की व्यवस्था करे। उन्हेंं प्रोत्साहित करेंं। उन्हेंं बाधा रहित वातावरण प्रदान करें। आप के प्रयासों से एक दिन वो सफल व्यक्ति बनेंगे।
-कुलदीप सिंह ठाकुर
★★★★★
तन्हाइयों में गुम ख़ामोशियों की
बन के आवाज़ गुनगुनाऊँ
ज़िंदगी की थाप पर नाचती साँसें
लय टूटने से पहले जी जाऊँ
-श्वेता
★
कैसे समझायें आवाज़ क्या होती है
जुबां वाले बेज़ुबां से पूछिएगा कभी
★
हमक़दम के विषय आवाज़
पर
हमारे रचनाकारों की
रचनात्मकता
का आस्वादन
आप भी करिये
★
आदरणीया मीना शर्मा जी
ना जाने किसकी है आवाज,
बुलाता है कोई !!!
ना है सूरत का पता
और ना ही सीरत का,
फिर भी मन पर मेरे
अधिकार जताता है कोई !
ना जाने किसकी है आवाज,
बुलाता है कोई !!!
★★★★★★
आदरणीमा कुसुम कोठारी जी की
दो रचना
आवाज दी शमा ने ओ परवाने
तूं क्यों नाहक जलता है।
मेरे फना होते ही हवा
मेरे पंख ले जाती है
रहती ना मेरे जलने की कोई निशानी
बस इतनी सी मेरी तेरी कहानी है ।
बस इतनी सी मेरी तेरी कहानी है।
★★★
सारा ब्रह्माण्ड ध्वनि और
प्रतिध्वनियों से गूंजारित रहता
जब तक हम उन्हें न करते
अक्षर रूप में हासिल
उनका नही होता कोई स्पष्ट स्वरूप
अक्षर दे सुनाई तो आवाज बनते
ढलते ही स्याही में शब्द बनते
अलंकृत होते तो काव्य बनते
लय बद्ध हो तो गीत बनते
★★★★★
आदरणीया नेहा दुबे जी
यहाँ एक और आवाज़ है जो
बाक़ी सुनी हुई आवाज़ों से अलग है,
हर सुनी हुई आवाज़ को पहचानती हूँ,
पर इस आवाज़ से अंजान हूँ,
ये आवाज़ है ख़ामोशी की आवाज़।
★★★★★
आवाज मीठी मधुर
कानों में रस घोलती
अपनी ओर आकृष्ट करती
आवाज प्रातः काल परिंदों की होती
स्वतः मन को रिझाती
कोयल की मधुर ध्वनि
कानों में रस घोलती
★★★★★
एक वक्त था जब
ज़रा सा शोर, ज़रा सी हलचल
या ज़रा सी भी आवाज़
नागवार गुज़रती थी
लिखना पढ़ना हो,
चिंतन मनन करना हो
★★★★★★
आवाज़ जो
धरती से आकाश तक
सुनी नहीं जाती
वो अंतहीन मौन आवाज़
हवा के साथ पत्तियों
की सरसराहट में
बस महसूस होती है
पर्वतों को लाँघकर
सीमाएँ पार कर जाती हैं
★★★★★
ना पुकारा है,ना पुकारूँगी,
ना रोका है,ना रोकूंगी,
तुम चलना निरंतर अपनी राह में,
मैं कभी भी पीछे से
ना आवाज़ दूंगी...,l
★★★★★
लगा जैसे नींद में
कोई आवाज़ दे रहा है
आओ ,आओ .....
अपना अमूल्य मत
हमें बेचो ,हमें बेचो
मुँहमाँगे दाम मिलेगें
अच्छा .........!!
हमनें कहा ....
रोजगार मिलेगा ?
हाँ ,हाँ ..जरूर.?
★★★★★
आवाज़ ही पहचान है
हर भाव की हर घाव की
आवाज़ से पहचान है
हर किसी जज़्बात की
सुनाई दे जाती है हर आवाज़
जब कुछ टूट कर बिखरे
नहीं सुनाई देती है तो
जब दिल टूट कर बिखरे
★★★★★
आवाज़ दबा दी जाती है अकसर
मन की,आत्मा की,
सुनी-अनसुनी करना
बन गई है फितरत हमारी।
कौन सुनता है ??
जब तड़पती हैं मासूम
हैवानों के बीच
दब जाती है आवाज
अट्टहासों में!!!
★★★★★
आदरणीय अनिता जी
नीर नयन का सूख गया,
बन मीठी मुस्कान,
बन मीठी मुस्कान,
लौट आएगे , माही मेरे
मन में था यही गान.. .....
★★★★★
आदरणीय शशि जी
और चलते-चलते उलूक के पन्नों से
डॉ. सुशील जोशी
कुत्तों का
भौंकना
तक उस
माहौल में
अपने मूल
को भूल कर
सियारों के
ही अन्दाज
की उसी
आवाज में
अपने आप
ही अपनी
आवाज को
तोल रहा
होता है
★
आपके द्वारा सृजित आज का
हमक़दम आपको
कैसा लगा?
अपनी प्रतिक्रिया
के माध्यम सेहमक़दम के लिए आपके
बहुमूल्य सुझाव
आमंत्रित है।
★
एक गीत सुनिये मेरी पसंद का
हमक़दम के अगला विषय जानने के लिए
कल का अंक पढ़ना न भूलेंं।
★
आज के लिए आज्ञा दीजिए।
-श्वेता सिन्हा













