सादर अभिवादन...
कल से पितृ-पक्ष चालू हो गया...
पितरों को आस बंधी कुछ तर खाने को मिलेगा
पड़ोसी भी उम्मीद लगाए हैं.....
चलिए चलते हैं एक श्राद्ध कार्यक्रम का जायजा लें...
कल से पितृ-पक्ष चालू हो गया...
पितरों को आस बंधी कुछ तर खाने को मिलेगा
पड़ोसी भी उम्मीद लगाए हैं.....
चलिए चलते हैं एक श्राद्ध कार्यक्रम का जायजा लें...

बेटे ने तर्पन करते हुए कहा, ''पापा, आज ऑफिस में थोड़ा ज्यादा काम हैं। इसलिए आप लोगों को वक्त नहीं दे सका। लेकिन हमने श्राद्ध के खाने की तैयारी कर ली हैं। मेल खोल लीजिए...अटैचमेंट में जाइए...दो पिज्जा, एक बर्गर और एक चाउमीन अटैच कर दिया हैं...हैप्पी मील पापा...सी...यू...बाय...बाय...!!!''

टटोल कर, मेरा भावुक सा मन,
बोल कर कई सुप्रिय वचन,
पूछ कर न जाने, कितने ही प्रश्न,
रख गया था कोई हाथ, मेरे हाथों में....

मौत तुमसे कभी मैं डरूंगा नहीं
मार दोगी मगर मैं मरूंगा नहीं
धुंध, आँधी, बवंडर न मुझको दिखा
रौशनी बन चुका हूँ बुझूंगा नहीं
हमें कुछ भेड़ियों की खून की आदत नहीं दिखती।
हमें तब बेटियों पर आ रही आफत नहीं दिखती।
ये खतरे से नहीं खाली किसी पर यूँ भरोसा हो।
नकाबी नक्श के पीछे हमें सूरत नहीं दिखती।

हवाओं ने लहरायें,
ग़ुम नाम मनसूबे,
हाथों ने फिर तेरा नाम संवारा,
भूल चुकी थी,
इश्क का गलियारा,
धङकनो ने फिर तेरा नाम पुकारा ।

कब आओगे परदेशी
तुम फिर से इन गलियों में
अब की में भी साथ चलूंगी
संग तेरे तेरी दुनिया में
सुई का काम चुभोना है
धागे का काम पिरोना है
एक दूजे में मिलना होगा
प्रेम से सब सिलना होगा।
आओ तुम सुई बन जाओ
मुझको भी खुद में समाओ
फूलों को भी खिलना होगा
रिश्तों को भी सिलना होगा।

इससे पहले
कोई समझले
क्या कह
दिया है
विषय ही
बदल दो
समय
रुकता नहीं है
सब जानते हैं
समझते नहीं हैं
मौका देखकर
समय को
ही बदल दो
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हम-क़दम
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम का अड़तीसवाँ क़दम
सप्ताह का विषय
एक चित्र है
एक चित्र है
इसे देखकर आपको कविता रचनी है
उपरोक्त विषय पर आप को एक रचना रचनी है
अंतिम तिथिः शनिवार 29 सितम्बर 2018
प्रकाशन तिथिः 01 अक्टूबर 2018 को प्रकाशित की जाएगी ।
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यशोदा
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