सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
उछले कूदे
कोलाहल मचाये
सोने जा रहे
सब रखे ताक पे
बेसुध वाली नींद
गिले शिकवे
स्पर्द्धा सत्यापनीय
उजड़े नींद
भोर में भिड़ने को
शिद्दत से जीने को

एक मौन हैं
सपनों का पुकार
निष्प्रयोजन
संग्राम प्यारी नींद
नसीब कारस्तानी

स्नातक स्तर
नहीं भी आती नींद
नेस्तनाबूद
स्वर्ग से बेआबरू
सन्निपात सिमटी
.jpg)
बिखरी नींद
ज्वर-जूड़ी चढ़ता
मित्र रहे तो
नीम-तुलसी पौधे
बाधा दूर भगाते

><
फिर मिलेंगे...
हम-क़दम
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम का सैंतीसवाँ क़दम
इस सप्ताह का विषय है
'तृष्णा'
...उदाहरण...
निर्णय-अनिर्णय के दोराहे पर डोलता जीवन,क्या कुछ पा लूँ, किसी और के बदले में,
क्यूँ खो दूँ कुछ भी, उन अनिश्चितता के बदले में,
भ्रम की इस किश्ती में बस डोलता है जीवन।
-पुरुषोत्तम सिन्हा
उपरोक्त विषय पर आप को एक रचना रचनी है
एक खास बात और आप इस शब्द पर फिल्मी गीत भी दे सकते हैं
अंतिम तिथिः शनिवार 22 सितम्बर 2018
प्रकाशन तिथि 24 सितम्बर 2018 को प्रकाशित की जाएगी ।
रचनाएँ पाँच लिंकों का आनन्द ब्लॉग के
सम्पर्क प्रारूप द्वारा प्रेषित करें