सादर अभिवादन....
नया कुछ भी नहीं....
कोई चेन स्नेचर भीड़ द्वारा पकड़ा जाता है
तो भीड़ उसको वाजिब सजा दे देती है....
और उस इलाके में महिला सुरक्षित हो जाती है
शायद यही सही न्याय है.....
खैर...आपको ले चलते हैं लिंक्स की ओर...
कोई चेन स्नेचर भीड़ द्वारा पकड़ा जाता है
तो भीड़ उसको वाजिब सजा दे देती है....
और उस इलाके में महिला सुरक्षित हो जाती है
शायद यही सही न्याय है.....
खैर...आपको ले चलते हैं लिंक्स की ओर...
कल जब सुप्रीमकोर्ट मॉब लिंचिंग पर अपने कथित ”कड़े-रुख” से सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा था, ठीक उसी समय बिहार के बेगूसराय में भीड़ ने चार हथियारबंद अपराधियों को उनके किये की सजा दे भी दी। ना तारीख… ना गवाह और फैसला ऑन द स्पॉट। यहां भीड़ ने उन चार में से दो को तो पीट-पीट कर ही मार डाला, तीसरे को पुलिस बचाकर ले गई और चौथा फरार हो गया। ये चारों बदमाश दो मोटरसाइकिलों पर हथियार लहराते हुए एक छात्रा को खोजते-खोजते न सिर्फ स्कूल तक जा पहुंचे बल्कि टीचर की कनपटी पर कट्टा रखकर धमकाने लगे। यह माज़रा देख बच्चों ने शोर मचाया तो पास ही खेतों में काम कर रही मजदूर-किसान महिलायें आईं और बदमाशों को घेर लिया। फिर पुरुषों द्वारा बदमाशों की पिटाई कर उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचा दिया गया।

रात बड़ी कंजूस है,
समेट रही है
अपने आँचल में
ओस की बूँदें,
नहीं जानती वह
कि चले जाना है उसे

यूं ही होता जब बंद किताबों के पन्ने पलटते हैं
सफे यादों के ठहरे रूके फिर - फिर चलते हैं
गम और खुशी सभी के हिस्सा ए हयात होता है
कभी हंसाता है और कभी बेपनाह रूलाता है

बरबस हुई प्रीत, उन लहरों से मुझे,
हँसकर बहती रही, ये लहरें देखकर मुझे,
रुक जाती काश! दो पल को ये लहर,
समेट लेता इन्हें, अपनी आगोश में भरकर,
बहती है लहरें, खामोश है किनारा....
रहबरी भी तिजारत हुई आजकल
जिसका मक़सद ही बस लूटना हो गया
जिसको देखा नहीं जिसको जाना नहीं
क्या कहें ,दिल उसी पे फ़ना हो गया

ये
लिखना भी
अजब होता है
लिखने
के बाद भी
बहुत कुछ होता है
टाँग देता है
कोई और
कहीं ले जा कर
लिखा हुआ
बस
उसे पढ़ने वाला
कहीं और को
गया होता है
आज बस इतना ही
आज्ञा दीजिए
यशोदा
आज्ञा दीजिए
यशोदा

