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मंगलवार, 4 सितंबर 2018

1145....जागो उठो

जय मां हाटेशवरी.....

आज सोच रहा हूं......
जीवन में क्या खोया, क्या पाया है.....
स्मरण  कर रहा हूं आज उनको.....
जो आज मेरे पास नहीं है.....
आज मेरे पास केवल उनकी यादें हैं.....
मुझे अपने जीवन में.....
अधिकांश अच्छे लोग ही मिले.....
कुछ ऐसे लोग भी मिले.....
जो अधिक अच्छे नहीं थे.....
उनसे भी मुझे कुछ विशेष क्षति नहीं हुई......
मैं आज उन हाथों को भी  याद करता हूं......
जिन्होंने मुझे अनेकों अनेक बार  हाथ पकड़कर रास्ता पार करवाया.....
मैं नहीं भूल सकता उन आंखों को.....
जो समय समय पर मेरे लिये काम आयी....
संसार बहुत ही सुंदर है......
उससे भी सुंदर ईश्वर की बनाई हुई हर चीज है......
....जो पढ़ा है.......
पेश है उस में से  कुछ चुनी हुई रचनाएं.....


प्रभु, मैं याचक हूँ, माँगती रहूँगी ...
 प्रभु,
मैंने देखा उनको कीमती वस्त्र चढ़ाते,
...
कम उम्र थी मेरी
तब बड़े यत्न से मैंने भी कुछ कुछ लिया,
लेकिन बड़ा अटपटा लगा ।


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संभावना
जब - जब हम हाथ मिलाएं
गर्मजोशी से ,
अपनी - अपनी कमियों में
देख पायें,
नयी संभावनाएं !


 मेरे विचार मेरी अनुभूति
जागो उठो
वंचित,शोषित,पीड़ित जन सब, उठो खड़े हो अपने दम पर
आत्मविश्वास जगाओ अभी, हो जाओ तुम खुद पर निर्भर |
अधिकार नहीं मिला किसी को, हाथ जोड़कर माँगो न कभी
ताकतवर शक्ति छीन लेते, तुम भी छीनो झुकना न कभी |
यह देश है तुम्हारा, मालिक तुम्ही हो इस हिंदुस्तान के


क्षतिपूर्ति (कहानी)
अरिजीत ने सेफ से पचास हजार रुपये निकाले और कर्मचारी को बुलाकर कहा,
“तुम तो उनके परिचित हो, ये जाकर उनको दे देना, कहना कि तुम अपनी ओर से दे रहे हो, आराम से अपना सेंटर खोलें...समझे? ये मत बताना कि डीएम साहब ने दिया है”
कर्मचारी विमल को मानने लगा था. उसका चेहरा खिल उठा. वह पैसे लेकर निकल गया.
“अब खुश?” अरिजीत ने तारिका से पूछा. तारिका ने हाँ में सिर हिलाया. अरिजीत बोला,
“उसकी बेटी को बड़ी होने दो, उसकी पढ़ाई का खर्च भी हम देंगे, कोई बहाना सोचना शुरू कर दो आज से उस मदद के लिए भी! हाहाहा”
“हाँ, जिस दिन उनके सामने जाने की हिम्मत जुट जाए, पैर पकड़ के माफी माँग लूँगी उनसे...” कहते-कहते तारिका के आँसू धारा बनके बहने लगे.



कर्म का उपदेश कान्हा नाम है ...
पूछ कर देखो बिहारी लाल से
है जहां पर प्रेम वो ब्रज-धाम है
रास हो बस रास हो गोपाल संग
गोपियों का घर न कोई ग्राम है
हे कन्हैया शरण में ले लो मुझ
तू ही मेरा कृष्ण तू ही राम है


पुलिसवाले तो पैसे लेते हैं सर! देते नहीं
लेकिन तभी सहा. प्रशासकीय अधिकारी ने दखल दिया। उन्हें लगा कि रकम तय करने में ऑडिटर ने चूक की है। उनके हिसाब से यह रकम ढाई हजार होनी थी। उन्होंने अपने हिसाब से गणना के ब्यौरे ऑडिट विभाग को भेजे। विभाग ने अपनी चूक मानी और वसूली साढ़े सात हजार से ढाई हजार पर आ गई। हम सबकी सहानुभूति कर्मचारी के साथ थी। उसने घपला तो किया नहीं था! मैंने ग्राहक का नाम पूछा। (तब तक मुझे केवल रकम बताई गई थी, ग्राहक का नाम नहीं।) नाम सुनकर मैं बल्लियों उछल पड़ा। वे मेरे अच्छे मित्र निकले।

मैं उन्हें तब से जानता हूँ जब वे उप निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) थे। नाम है - श्री ए. पी. तोमर। रेकार्ड में श्री अनंग पाल सिंह तोमर और दुनियादारी में श्री आनन्द पाल सिंह तोमर। वे खण्डवा में हैं। बहुत ही शानदार आदमी। उनसे बात किए बिना ही मैंने सबको भरोसा दिला दिया कि वे रकम लौटा देंगे। कर्मचारियों ने अविश्वास
और हैरत से कहा - ‘लौटा देंगे! आप कैसे कह रहे हैं? आपने बात कर ली उनसे?’ मैंने बताया कि वे ऐसे आदमी हैं जिनसे बात किए बिना ही उनकी ओर से वादा किया जा सकता

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हिंदी दिवस: हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए...
इंसान की कल्पनाशक्ती का विकास मातृभाषा में ही हो सकता हैं। सच्चाई यहीं हैं कि अंग्रेजी की तुलना में हिंदी इंसान को ज्यादा समृद्ध बना सकती हैं।

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हम-क़दम
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम का पैंतीसवाँ क़दम
इस सप्ताह का विषय है
'मितवा'
...उदाहरण...
कल से क्या
आज से गवाही ले मितवा
आंखों में झीलें हैं
झीलों में रंग
रंगवती हलचल की
-हरीश भादानी
उपरोक्त विषय पर आप को एक रचना रचनी है
एक खास बात और आप इस शब्द पर फिल्मी गीत भी दे सकते हैं


चाहूँगा मैं तुझे....
दर्द भी तू चैन भी तू
दरस भी तू नैन भी तू
मितवा ...
मेरे यार तुझको बार बार
आवाज़ मैं न दूँगा, आवाज़ मैं न दूँगा

अंतिम तिथिः शनिवार 08 सितम्बर 2018
प्रकाशन तिथि 10 सितम्बर 2018  को प्रकाशित की जाएगी ।

रचनाएँ  पाँच लिंकों का आनन्द ब्लॉग के
सम्पर्क प्रारूप द्वारा प्रेषित करें
 
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धन्यवाद।
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